सर्वोच्च न्यायालय ने महिला विद्यार्थियों और कर्मियों के लिए मासिक धर्म अवकाश संबंधी राष्ट्रव्यापी नीति की मांग वाली जनहित याचिका पर विचार करने से आज इंकार कर दिया। न्यायालय ने कहा कि इस तरह से कोई भी उन्हें नौकरियां नहीं देगा। शीर्ष न्यायालय ने कहा कि इस तरह के प्रावधान जानबूझकर महिला और पुरूषों के बीच भेद-भाव से जुडी पहले की धारणाओं को और मजबूत करेंगे। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने कहा कि सक्षम प्राधिकरण इस पर विचार कर सकता है और सभी संबंधित पक्षों के साथ विचार विमर्श करके मासिक धर्म अवकाश पर नीति बनाने की संभावना का आकलन कर सकता है।
News On AIR | मार्च 13, 2026 6:46 अपराह्न
मासिक धर्म अवकाश पर राष्ट्रव्यापी नीति की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से सर्वोच्च न्यायालय का इंकार