जनवरी 13, 2026 2:37 अपराह्न

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महिला राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर बांग्लादेश की पार्टियों और चुनाव आयोग की कड़ी आलोचना

बांग्लादेश में होने वाले 13वें जातीय संसद चुनाव में हिस्सा ले रहे 2 हज़ार 5 सौ 68 उम्मीदवारों में से सिर्फ़ 109 महिलाएँ हैं। यह भागीदारी सिर्फ़ चार प्रतिशत से थोड़ी अधिक है। महिला अधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार राजनीतिक पार्टियां और चुनाव अधिकारी महिला-पुरूष प्रतिनिधित्‍व के अपने सबसे बुनियादी वादों को भी निभाने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं।

    सोमवार को ढाका रिपोर्टर्स यूनिटी में महिलाओं की राजनीतिक अधिकारों के मंच के एक संवाददाता सम्‍मेलन में इस मुद्दे की कड़ी आलोचना की गई। इस सम्‍मेलन में वक्ताओं ने राजनीतिक पार्टियों पर महिलाओं की भागीदारी को लोकतांत्रिक ज़रूरत के बजाय प्रतिकात्‍मक मानने का आरोप लगाया। मौजूदा वादों को लागू करने में नाकाम रहने के लिए चुनाव आयोग की भी आलोचना की गई।

    इस मंच के अनुसार जुलाई नेशनल चार्टर 2025 राजनीतिक पार्टियों को इस चुनाव में कम से कम पांच प्रतिशत महिला उम्मीदवारों को नामांकित करने के लिए बाध्‍यकारी बनाता है। इसका लक्ष्य धीरे-धीरे इस हिस्से को बढ़ाकर 33 प्रतिशत करना है। फिर भी वास्‍तव में यह भागीदारी कम से कम है। चुनाव लड़ रही 51 पार्टियों में से 30 ने एक भी महिला को नामांकित नहीं किया है। कार्यकर्ताओं ने कहा कि ये आंकड़े पार्टी राजनीति में गहरे संरचनात्‍मक भेदभाव को दिखाते हैं और उन पार्टियों के भरोसे पर सवाल उठाते हैं जो जन सभाओं में महिला-पुरूष समानता का समर्थन करती हैं। लेकिन असल में वे पार्टियां इसे नज़रअंदाज़ करती हैं।

    इस मंच ने तुरंत जवाबदेही की मांग की और कहा कि राजनीतिक पार्टियां जनता के सामने अपनी नाकामी बताएं और चुनाव आयोग महिलाओं के राजनीतिक अधिकारों के उल्लंघन को सुलझाने में अधिक प्रभावशाली भूमिका निभाए।