जनवरी 9, 2026 4:06 अपराह्न

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भाषा का महत्व केवल संचार तक सीमित नहीं, यह संस्कृति, विरासत और परंपराओं को संजोती है: उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा है कि भाषा का महत्व केवल संचार तक ही सीमित नहीं है।  यह संस्कृति, विरासत और परंपराओं को संजोती है और आने वाली पीढ़ियों के लिए संस्कृति को संरक्षित रखती है। श्री राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली में आयोजित तीसरे अंतर्राष्ट्रीय भारतीय भाषा सम्मेलन में यह बात कही। उपराष्ट्रपति ने इस बात पर बल दिया कि भाषाएं समाज की सामूहिक स्मृति का भंडार होती हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में असमिया भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया गया। उपराष्ट्रपति ने आयुर्वेद में मलयालम भाषा के योगदान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि प्राचीन पत्थर और ताड़ के पत्तों पर खुदे शिलालेखों से लेकर आज के डिजिटल स्क्रीन तक, भाषा ने मानव प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।