जनवरी 13, 2026 9:17 अपराह्न

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भारत ‘मानवता प्रथम और जन-केंद्रित दृष्टिकोण’ के साथ ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है: विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा है कि भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में ‘मानवता प्रथम और जन-केंद्रित दृष्टिकोण’ के साथ ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। डॉ. जयशंकर ने कहा है कि इस वर्ष होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्‍मेलन का विषय है – लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता प्रमुख प्राथमिकताएं। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लोगो, थीम और वेबसाइट के लॉन्च के अवसर पर विदेश मंत्री ने कहा कि यह विषय सभी के लाभ के लिए क्षमताओं को मजबूत करने, नवाचार को बढ़ावा देने और सतत विकास सुनिश्चित करेगा।

डॉ जयशंकर ने कहा कि वर्षों से, ब्रिक्स ने बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप अपने एजेंडे और सदस्यता का विस्तार किया है, साथ ही जन-केंद्रित विकास, संवाद को बढ़ावा देने और व्यावहारिक सहयोग को प्रोत्साहित करने पर भी ध्यान केंद्रित रखा है। उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं, जटिल आर्थिक परिदृश्य, जलवायु संबंधी जोखिम, तकनीकी परिवर्तन और विकास में लगातार बनी हुई कमियां विभिन्न क्षेत्रों के देशों को प्रभावित कर रही हैं। डॉ. जयशंकर ने कहा कि इस संदर्भ में, ब्रिक्स एक महत्वपूर्ण मंच बना हुआ है जो राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और विकास के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए संवाद और सहयोग तथा समाधानों को प्रोत्साहित करता है।

उन्होंने इस बात पर बल दिया कि ब्रिक्स 2026 की भारत की अध्यक्षता के दौरान लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता प्रमुख प्राथमिकताएं होंगी। डॉ. जयशंकर ने कहा कि ये प्राथमिकताएं समूह के तीन मूलभूत स्तंभों – राजनीतिक और सुरक्षा, आर्थिक और वित्तीय, और सांस्कृतिक और जन-समुदाय आदान-प्रदान – के लिए एक सुसंगत ढांचा प्रदान करेंगी।
विदेश मंत्री ने कहा कि शिखर सम्मेलन के दौरान भारत वैश्विक कल्याण के लिए ब्रिक्स देशों की क्षमता को एकजुट करने का प्रयास करेगा। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स इस वर्ष 20 वर्ष पूरे कर रहा है, जिसके दौरान यह उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के बीच एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में लगातार विकसित हुआ है।

डॉ जयशंकर ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में ब्रिक्स ने अपने एजेंडे और सदस्यता का विस्तार किया है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि मंच जन-केंद्रित विकास पर ध्यान देते हुए, व्यावहारिक सहयोग को प्रोत्साहित करने के लिए बदलती वैश्विक वास्तविकताओं के प्रति प्रतिक्रिया देता रहा है।