विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि भारत-मध्यपूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे का उद्देश्य संपर्क, रसद और व्यापार सुनिश्चित करना है। म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में कल डॉ. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र में तत्काल सुधार की आवश्यकता पर बल दिया है। इसका उद्देश्य समकालीन भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित और आज की वैश्विक चुनौतियों का प्रभावी ढंग से समाधान करना है। उन्होंने तेल खरीद नीति के बारे कहा कि भारत में तेल कंपनियां, यूरोप और दुनिया के अन्य हिस्सों की तरह, उपलब्धता, लागत और जोखिम को ध्यान में रखते हुए सर्वोत्तम हित के निर्णय लेती है। उन्होंने यह भी कहा कि विश्व अधिक बहुध्रुवीयता की ओर बढ़ रहा है और निर्णय लेने के लिए कई और स्वतंत्र या स्वायत्त केंद्र होंगे।
विदेश मंत्री ने म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन के दौरान जी7 देशों के विदेश मंत्रियों से भी बातचीत की। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सार्थक सुधारों सहित यू.एन.@80 एजेंडा के प्रति भारत के समर्थन को दोहराया। डॉ. जयशंकर ने समुद्री संचार मार्गों की सुरक्षा, प्राथमिक प्रतिक्रियाकर्ता के रूप में कार्य करने, बंदरगाह सुरक्षा को मजबूत करने और लचीले पनडुब्बी केबल अवसंरचना में योगदान देने में देश की भूमिका पर बल दिया। विदेश मंत्री ने कहा कि बातचीत से भारत और जी7 देशों के बीच कई समानताओं और साझा हितों का पता चला है।