भारत के मुख्य न्यायाधीश भूषण आर. गवई ने आज शाम हैदराबाद स्थित उस्मानिया विश्वविद्यालय में भारत का संविधान: डॉ. बी. आर. आम्बेडकर का योगदान विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने संविधान के मुख्य शिल्पकार के रूप में डाक्टर आम्बेडकर की प्रमुख भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने विशेष रूप से स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व जैसे अधिकारों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक तंत्र, जैसे अनुच्छेद 32, संवैधानिक उपचारों के अधिकार को समाहित करने में डॉ. आम्बेडकर की विशेष भूमिका थी। न्यायमूर्ति गवई ने इस बात पर ज़ोर दिया कि संविधान को समाज के साथ तालमेल बैठाना होगा। उन्होंने संविधान के गतिशील विस्तार का उल्लेख किया।
श्री गवई ने कहा कि विशेष रूप से अनुच्छेद 21 की न्यायिक व्याख्या के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, सम्मान, पर्यावरण आदि तक विस्तारित किया गया। ऐसा होना डॉ. आम्बेडकर के दृष्टिकोण के अनुरूप है। मुख्य न्यायाधीश ने दोहराया कि विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका को संवैधानिक सर्वोच्चता के तहत काम करना चाहिए और संसद सहित सभी के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों को सर्वोपरि रखना चाहिए।