अगस्त 28, 2025 1:58 अपराह्न

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भारत और जापान के बीच विशेष कूटनीतिक और वैश्विक सहभागिता का लंबा इतिहास

भारत और जापान के बीच विशेष कूटनीतिक और वैश्विक सहभागिता है। दोनों देशों के संबंधों का लंबा इतिहास है, जिसकी जड़ें आध्‍यात्मिक जुड़ाव और मजबूत सांस्‍कृतिक और सभ्‍यागत संबंधों में है। एशिया के ये दो बड़े लोकतंत्र दुनिया की पांच बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था में शामिल हैं। भारत-जापान संबंधों का वर्ष 2000 में वैश्विक सहभागिता, 2006 में कूटनीतिक और वैश्विक सहभागिता तथा 2014 में विशेष कूटनीतिक और वैश्विक सहभागिता तक विस्‍तार हुआ है। वर्ष 2006 से दोनों देशों का वार्षिक शिखर सम्‍मेलन आयोजित होता रहा है। भारत और जापान अनेक मुद्दों पर दृष्टिकोण साझा करते हैं। पिछले दशक में दोनों देशों के बीच व्‍यापार और निवेश, रक्षा तथा सुरक्षा, तकनीकी और नवाचार तथा लोगों के बीच सम्‍पर्क का लगातार विस्‍तार हुआ है। भारत और जापान क्षे‍त्रीय तथा वैश्विक चुनौतियों से संबंधित विचार-विमर्श में भी शामिल है। दोनों देशों का द्विपक्षीय व्‍यापार वित्‍त वर्ष 2023-24 में 22.85 बिलियन अमरीकी डॉलर था। भारत के आर्थिक विकास में जापान प्रमुख सहयोगी रहा है। वर्ष 2000 से 2024 के बीच भारत में जापान का प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश 43 बिलियन अमरीकी डॉलर से कम हो गया। जापान भारत में विदेशी निवेश का पांचवां सबसे बड़ा स्रोत है।