संघ लोक सेवा आयोग-यूपीएससी के अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार ने कहा है कि भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता एआई के क्षेत्र में अग्रणी होने की राह पर है। डॉ. कुमार ने आज दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज के 127वें स्थापना दिवस समारोह में यह बात कही। उन्होंने कहा कि एआई स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण के मामले में कमी से प्रचुरता ज़रूरत की ओर जाने का अवसर लेकर आया है।
डॉ. कुमार ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता से उत्पन्न विभिन्न चुनौतियों की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जब सब कुछ आसानी से मिल जाता है, तो बस आराम में डूब जाना अच्छा लगता है। यूपीएससी के अध्यक्ष ने कहा कि एआई मनुष्य के उन सभी सवालों के जवाब नहीं दे सकता जिनसे भविष्य तय होगा। डॉ. कुमार ने कहा कि भविष्य इस बात से तय नहीं होगा कि ज़िंदगी कितनी आसान हो जाती है, बल्कि इस बात से तय होगा कि आप उस आसानी के साथ क्या करना चुनते हैं। उन्होंने कहा कि इस पीढ़ी ने भावना को ज्ञान से अलग करने का स्किल डेवलप कर लिया है। डॉ. कुमार ने कहा कि भावना को ज्ञान से फिल्टर करने का कौशल सीखना बहुत ज़रूरी है।
डॉ. कुमार ने कहा कि एआई के ज़माने में गलत जानकारी भी होती है और यह खतरनाक है। उन्होंने इस बात को दोहराया कि अगर कोई चीज़ आपको तुरंत समझदार महसूस कराती है, तो हो सकता है कि वह आपके लिए सोच रही हो। उन्होंने कहा कि ताकत सिर्फ़ जानकारी लेने से नहीं, बल्कि उसके बारे में सोचने, उस पर सवाल उठाने और यह पहचानने से आएगी कि असल में क्या मायने रखता है। उन्होंने यह भी कहा कि इससे कोई भी एआई और कभी न खत्म होने वाले शोर की दुनिया में आगे बढ़ पाएगा। दिल्ली विश्वविद्यालय के तहत हिंदू कॉलेज की स्थापना 1899 में हुई थी। कॉलेज का आइडिया भारत के आज़ादी के आंदोलन से आया था, जो अपनी स्थापना के बाद से और मज़बूत हुआ है।