बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद ने सरकार पर सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं को कम करके बताने का आरोप लगाया है। परिषद का दावा है कि वर्ष 2025 में देश भर में 522 घटनाएं हुईं, जो आधिकारिक तौर पर स्वीकार की गई 71 घटनाओं से कहीं अधिक हैं। इससे 12 फरवरी, वर्ष 2026 को होने वाले संसदीय चुनाव से पहले गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं। ढाका के राष्ट्रीय प्रेस क्लब में गुरुवार को आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में अल्पसंख्यक अधिकार समूह ने कहा कि इन घटनाओं में 66 लोगों की मौत हुई, जिनमें महिलाओं के खिलाफ हिंसा के 28 मामले, पूजा स्थलों पर 95 हमले और अल्पसंख्यकों के घरों और व्यवसायों पर एक 100 से अधिक हमले शामिल हैं। हिंसा में भूमि हड़पना, आगजनी, लूटपाट, अपहरण, जबरन वसूली, यातना और धार्मिक निंदा के आरोपों में गिरफ्तारियां भी शामिल हैं।
परिषद के कार्यवाहक महासचिव मोनिंद्र कुमार नाथ ने कहा कि ये आंकड़े जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों से संकलित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े धार्मिक तथा जातीय अल्पसंख्यकों के खिलाफ लक्षित हमलों के एक पैटर्न को दर्शाते हैं। उन्होंने सरकार के रिकार्ड को खारिज करते हुए मुख्य सलाहकार के 19 जनवरी के फेसबुक पोस्ट का हवाला दिया, जिसमें अल्पसंख्यकों से जुड़ी 645 घटनाओं की पहचान की गई थी, लेकिन केवल 71 को सांप्रदायिक करार दिया गया था।
परिषद ने सवाल उठाया कि हिंदू और आदिवासी व्यक्तियों की हाई-प्रोफाइल हत्याओं को केवल इसलिए गैर-सांप्रदायिक कैसे माना जा सकता है क्योंकि वे पूजा स्थलों के अंदर नहीं हुईं। परिषद ने अल्पसंख्यक नेताओं और कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न की भी निंदा की और झूठे मामलों को वापस लेने तथा चुनाव से पहले हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई की मांग की।
चुनाव-पूर्व माहौल के बिगड़ने की चेतावनी देते हुए, परिषद ने कहा कि जनवरी 2026 में कम से कम 42 नई घटनाएं दर्ज की गई हैं। इससे अल्पसंख्यक समुदायों में भय, आर्थिक व्यवधान और आंतरिक विस्थापन पैदा हो रहा है, जो मतदाताओं की भागीदारी को कम कर सकता है। परिषद ने सरकार और चुनाव आयोग पर अल्पसंख्यक सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहने का आरोप लगाया और एक साथ जनमत संग्रह की आलोचना करते हुए कहा कि यह धर्मनिरपेक्षता को दरकिनार करता है और चिंता को गहरा करता है।
एकता परिषद ने अधिकारियों से चुनाव प्रचार में धार्मिक बयानबाजी पर प्रतिबंध लगाने, अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में पर्याप्त सुरक्षा तैनात करने, घृणास्पद भाषण और हिंसा पर कड़ी कार्रवाई करने तथा अल्पसंख्यक संरक्षण अधिनियम, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग, आरक्षित संसदीय सीटें और मजबूत भेदभाव-विरोधी कानूनों सहित दीर्घकालिक सुधारों को आगे बढ़ाने का आग्रह किया। अंत में, श्री मोनिंद्र कुमार नाथ ने कहा कि अल्पसंख्यक लोकतांत्रिक भागीदारी के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि तत्काल और विश्वसनीय कार्रवाई के बिना, भय और असुरक्षा एक समावेशी और विश्वसनीय चुनाव को कमजोर कर सकती है।