बांग्लादेश में कल उस समय राजनीतिक तनाव बढ़ गया जब 13वीं संसद के नव निर्वाचित सदस्यों ने प्रस्तावित संवैधानिक सुधार परिषद के सदस्य के रूप में अतिरिक्त शपथ लेने पर असहमति जताई। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी – बीएनपी के सदस्यों ने जातीय संसद भवन में केवल संसद सदस्य के रूप में शपथ ली और दूसरी शपथ लेने से इनकार कर दिया। पार्टी नेताओं ने कहा कि वे सांसद के रूप में चुने गए हैं, परिषद के सदस्य के रूप में नहीं। उनका तर्क था कि परिषद को पहले संसदीय प्रक्रियाओं के माध्यम से संविधान में शामिल किया जाना चाहिए। नूरुल हक नूर और जोनयेद साकी सहित कई निर्दलीय और छोटी पार्टियों के नेताओं ने भी सुधार परिषद की शपथ लेने से मना किया।
इसके विपरीत, बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी और नेशनल सिटीजन पार्टी के सांसदों ने राज्य के मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा दिलाई गई संसदीय और सुधार परिषद की शपथ लीं।
यह असहमति हाल ही में हुए जनमत संग्रह के बाद सामने आई है जिसमें संवैधानिक सुधार और जुलाई के राष्ट्रीय चार्टर का समर्थन किया गया था। इसमें संवैधानिक सुधार परिषद के गठन का प्रस्ताव है। बीएनपी ने कहा कि वह सुधार के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन उन्होंने कहा कि बदलावों को पहले संसद में कानूनी रूप से अपनाया जाना चाहिए। कानूनी विशेषज्ञों ने संविधान में अभी तक औपचारिक रूप से मान्यता प्राप्त न हुई परिषद के लिए अलग से शपथ दिलाने की संवैधानिक वैधता पर भी सवाल उठाया, जिससे भविष्य में अदालती चुनौतियों की संभावना बढ़ गई है।