बलूच राष्ट्रीय आंदोलन ने मानवाधिकार कार्यकर्ता बनुक करीमा बलूच की पांचवीं पुण्यतिथि पर लंदन में एक संगोष्ठी का आयोजन किया। इसमें बलूचिस्तान में पाकिस्तानी अधिकारियों के नियोजित दमन का उल्लेख किया गया। इस कार्यक्रम में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और गिलगित-बाल्तिस्तान के नेता, बुद्धिजीवी, मानवाधिकार कार्यकर्ता तथा सिंधी, पश्तून और अन्य समुदायों के प्रतिनिधि एकत्रित हुए।
बलूच राष्ट्रीय आंदोलन के अध्यक्ष नसीम बलूच ने कहा कि करीमा के जीवन और शहादत ने पाकिस्तान के औपनिवेशिक स्वरूप और उत्पीड़ित क्षेत्रों पर उसके व्यवस्थित दमन को उजागर किया। मानवाधिकार कार्यकर्ता नूर-ए-मरियम कंवर ने कहा कि सामूहिक दमन बलूचिस्तान के लोगों के प्रतिरोध को दबाने के लिए पाकिस्तानी अधिकारियों का सबसे क्रूर तरीका है।