दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू ने कहा कि प्रौद्योगिकी, सतत विकास और आत्मनिर्भरता का समन्वय ही भारत के शहरी भविष्य को दिशा देगा। वे राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर इंद्रप्रस्थ विज्ञान भारती द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। श्री संधू ने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और बौद्धिक आत्मविश्वास आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव हैं। श्री संधू ने कहा कि प्रौद्योगिकी का उद्देश्य केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित रहना नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य, परिवहन, स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण प्रबंधन जैसी वास्तविक चुनौतियों का समाधान करना होना चाहिए।
उपराज्यपाल ने विज्ञान और सुशासन के बीच बेहतर समन्वय को प्रभावी, पारदर्शी और जवाबदेह नागरिक सेवाओं के लिए आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण में दीर्घकालिक सफलता धैर्य, अनुशासन और नवाचार की भावना से ही प्राप्त की जा सकती है। जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में उन्होंने डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों की रोकथाम के लिए डेटा और एआई आधारित पूर्व चेतावनी प्रणालियों के विकास पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी तकनीकें संभावित संक्रमण क्षेत्रों की समय रहते पहचान कर स्वास्थ्य विभाग को सक्रिय कदम उठाने में मदद कर सकती हैं।
युवाओं को संबोधित करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि भारत की प्रगति एआई, जैव प्रौद्योगिकी और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में उनके नवाचार, अनुसंधान और जिम्मेदार नेतृत्व पर निर्भर करेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि आधुनिकता और सतत विकास के बीच संतुलन ही भारत के वैज्ञानिक और सामाजिक भविष्य को मजबूत बनाएगा।