प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज नई दिल्ली के राय पिथोरा सांस्कृतिक परिसर में भगवान बुद्ध से संबंधित पवित्र पिपरावा अवशेषों की भव्य अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इसका शीर्षक है, “प्रकाश और कमल: प्रबुद्ध व्यक्ति के अवशेष”।
इस अवसर पर सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एक सौ पच्चीस वर्षों के इंतजार के बाद भारत की विरासत और धरोहर वापस लौट आई है। उन्होंने कहा कि आज से देश के लोग भगवान बुद्ध के इन पवित्र अवशेषों के दर्शन कर सकेंगे और उनका दिव्य आशीर्वाद प्राप्त कर सकेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया कि भगवान बुद्ध के अवशेषों को ले जाने वाले लोग उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार में नीलाम करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन भारत के लिए ये अवशेष उसके भगवान और समाज का अभिन्न अंग हैं। उन्होंने कहा कि इसीलिए सरकार ने इनकी नीलामी रोकने का फैसला किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत न केवल भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों का संरक्षक है, बल्कि उस शाश्वत परंपरा का जीवंत वाहक भी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के लिए भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष मात्र कलाकृतियाँ नहीं हैं, बल्कि वे देश की पूजनीय विरासत का हिस्सा और उसकी सभ्यता का अभिन्न अंग हैं। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध द्वारा दिखाया गया ज्ञान और मार्ग समस्त मानवता का है।
बौद्ध विरासत का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने विश्व भर में बौद्ध विरासत स्थलों के विकास में योगदान देने के लिए निरंतर प्रयास किए हैं। उन्होंने कहा कि बौद्ध स्थलों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है और तीर्थयात्रियों के लिए नई सुविधाएं बनाई जा रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भगवान बुद्ध की शिक्षाएं मूल रूप से पाली भाषा में हैं और उनकी सरकार का प्रयास पाली भाषा को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से पाली को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया गया है।
वर्ष 1898 में खोजे गए पिपरावा अवशेष प्रारंभिक बौद्ध धर्म के पुरातात्विक अध्ययन में केंद्रीय स्थान रखते हैं। ये भगवान बुद्ध से सीधे जुड़े सबसे प्राचीन और ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण अवशेषों में से हैं। पुरातात्विक साक्ष्य पिपरावा स्थल को प्राचीन कपिलवस्तु से जोड़ते हैं, जिसे व्यापक रूप से वह स्थान माना जाता है जहां भगवान बुद्ध ने संन्यास लेने से पहले अपना प्रारंभिक जीवन व्यतीत किया था। यह प्रदर्शनी पिपरावा से एक शताब्दी से अधिक समय बाद वापस लाए गए उन अवशेषों को पहली बार एक साथ प्रस्तुत करती है जो राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली और भारतीय संग्रहालय, कोलकाता के संग्रह में संरक्षित हैं।
केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि यह ऐतिहासिक घटना, 127 वर्षों के बाद वापस लाए गए भगवान बुद्ध के पिपरावा रत्न अवशेषों के पुनर्मिलन का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह पूरे देश के लिए प्रेरणा और गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि उनका मंत्रालय देश की विरासत के संरक्षण के साथ विकास के प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण के अनुरूप कार्य कर रहा है।
केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि उनका मंत्रालय देश की पुरातात्विक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण और देश की सांस्कृतिक परंपराओं को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।
यह प्रदर्शनी भगवान बुद्ध की शिक्षाओं के साथ भारत के गहरे और निरंतर सभ्यतागत संबंध को उजागर करती है और देश की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इन अवशेषों की हालिया वापसी सरकार के निरंतर प्रयासों, संस्थागत सहयोग और अभिनव सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से संभव हुई है।