अक्टूबर 2, 2025 1:13 अपराह्न

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प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में नक्सल मुक्त भारत की दिशा में तेज प्रगति

सेवा और सुशासन, यानी जनसेवा और सुशासन के मंत्र पर चलते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार परिवर्तन और प्रगति लाने के अथक प्रयास कर रही है। आज, इस विशेष श्रृंखला – ‘सेवा पर्व’ में, हम आपको बताएगें कि कैसे मोदी सरकार ने नक्सल मुक्त भारत का मार्ग प्रशस्त किया है। पिछले 11 वर्षों में नरेन्‍द्र मोदी सरकार ने वामपंथी उग्रवाद को कतई बर्दाश्‍त न करने का दृष्टिकोण अपनाया है।

सरकारी योजनाओं को शत-प्रतिशत लागू करने से सरकार वामपंथ उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों का पूर्ण विकास करना चाहती है। अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण में, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि नक्सलवाद और माओवाद के कारण कभी लाल गलियारे के रूप में जाने जाने वाले क्षेत्र अब हरित विकास के गलियारे बन रहे हैं। मोदी सरकार ने वामपंथी उग्रवाद से निपटने के लिए दो प्रमुख नियम निर्धारित किए हैं। पहला, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हिंसा को समाप्त करने के लिए कानून-व्यवस्था लागू करना और दूसरा, वर्षों से चले आ रहे नक्सली व्यवधान के कारण विकास में आई कमी को शीघ्रता से दूर करना। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास लाने के लिए, इन क्षेत्रों के लिए बजट आवंटन में 300 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।

मोदी सरकार 2004 से 2014 की अवधि की तुलना में नक्सली हिंसा की घटनाओं में 53 प्रतिशत की कमी लाई है। सुरक्षा बलों के हताहत होने की संख्या में भी 73 प्रतिशत की कमी आई है। भारत सरकार ने अगले वर्ष 31 मार्च तक नक्सलवाद को पूरी तरह से समाप्त करने का लक्ष्य रखा है। सरकार ने क्षेत्रीय और परिचालन दोनों स्तरों पर वामपंथी उग्रवाद को काफी हद तक कमजोर कर दिया है। सुरक्षा, विकास और अधिकार-आधारित सशक्तिकरण ने प्रभावित क्षेत्रों के परिदृश्य को बदल दिया है। इस सतत राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रशासनिक प्रतिबद्धता के साथ, वामपंथी उग्रवाद मुक्त भारत का सपना साकार होने में पहले से कहीं अधिक निकट है।
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