प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने युवा आध्यात्मिक शिखर सम्मेलन के महत्व पर जोर देते हुए एक लेख साझा किया है और इसे नशा मुक्त भारत की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है। केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री मनसुख मांडविया के एक पोस्ट के जवाब में, श्री मोदी ने कहा कि डॉ. मांडविया ने विस्तार से बताया है कि युवा आध्यात्मिक शिखर सम्मेलन किस तरह से नशा मुक्त भारत के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
एमवाई- भारत पहल के अंतर्गत ‘युवा आध्यात्मिक शिखर सम्मेलन’ काशी के पवित्र घाटों पर “विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा” विषय पर आयोजित किया जा रहा है। दो दिन का यह शिखर सम्मेलन कल शुरू हुआ था और यह मोदी सरकार के नशा मुक्त भारत अभियान का हिस्सा है। इसका उद्देश्य युवाओं के नेतृत्व में कई पहलों के माध्यम से मादक पदार्थों का सेवन समाप्त करना है।
डॉ. मांडविया ने अपने पोस्ट में इस बात पर ज़ोर दिया कि यह शिखर सम्मेलन केवल एक आध्यात्मिक बैठक ही नहीं है बल्कि यह नशे की लत के खिलाफ एक राष्ट्रव्यापी युवा आंदोलन की शुरुआत है। उन्होंने लिखा है कि “भारत के युवा नशे के खतरे से मुक्त भविष्य को आकार देने में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।”
इस कार्यक्रम में युवा नेता, आध्यात्मिक मार्गदर्शक और सामाजिक प्रभावशाली लोग एकजुट हुए, जिन्होंने मानसिक स्वास्थ्य, आध्यात्मिकता और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से नशीली दवाओं के दुरुपयोग से निपटने के समग्र दृष्टिकोण पर चर्चा की।
प्रधानमंत्री द्वारा इस पहल का समर्थन, 2047 तक एक विकसित और नशा-मुक्त भारत बनाने के मिशन में युवाओं को शामिल करने पर सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।