प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इस्राएल के प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू ने शांति, सुरक्षा और समृद्धि के लिए, तकनीकी नवाचारों और उद्यमशीलता के माध्यम से, पारस्परिक आकांक्षाओं पर आधारित मजबूत विशेष रणनीतिक भागीदारी के अपने साझा दृष्टिकोण की पुष्टि की है। भारत-इस्राएल संयुक्त वक्तव्य में, दोनों नेताओं ने स्वीकार किया कि दोनों देशों की क्षमताएं एक-दूसरे की पूर्णतः पूरक हैं। इस्राएल प्रौद्योगिकी और नवाचार की वैश्विक महाशक्ति है, और भारत प्रतिभा, विनिर्माण उत्कृष्टता तथा उद्यमशील ऊर्जा का केंद्र है। दोनों नेताओं ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग, जैव प्रौद्योगिकी, कृषि तथा जल प्रबंधन, रक्षा प्लेटफार्मों तथा अंतरिक्ष अन्वेषण में भारत और इस्राएल की प्रगति को एकीकृत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
पिछले वर्ष 4 नवंबर को हस्ताक्षरित रक्षा सहयोग समझौता ज्ञापन का स्वागत करते हुए, उन्होंने दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग में हुई महत्वपूर्ण वृद्धि को स्वीकार किया, जो दायरे और पैमाने दोनों में हुई है। दोनों नेताओं ने भविष्य के रक्षा सहयोग के लिए दृष्टिकोण और रोडमैप प्रस्तुत किया।
दोनों नेताओं ने सीमा पार आतंकवाद सहित आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की स्पष्ट और कड़ी निंदा की। उन्होंने आतंकवाद से व्यापक तथा सतत तरीके से निपटने के लिए निर्णायक और समन्वित अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का आह्वान किया। इस साझा चुनौती पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए, दोनों प्रधानमंत्रियों ने दो जीवंत और सशक्त लोकतंत्रों के नेताओं के रूप में इस खतरे से लड़ने के अपने सामूहिक संकल्प की पुष्टि की। उन्होंने 7 अक्टूबर 2023 को इस्राएल पर हुए जघन्य आतंकी हमले, पिछले साल 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में भारतीय पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले और पिछले साल 10 नवंबर को नई दिल्ली में लाल किले के पास हुई आतंकी घटना की कड़ी निंदा की।
प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने वैश्विक शांति तथा सुरक्षा को आगे बढ़ाने के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता दोहराई और अमरीका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प की “गाजा संघर्ष को समाप्त करने की व्यापक योजना” का स्वागत किया।