जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने इटली के अपुलिया पहुचें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कई देशों के प्रमुखों से द्विपक्षीय बैठके की। श्री मोदी ने आज दोपहर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने रक्षा, परमाणु, अंतरिक्ष, शिक्षा, जलवायु क्षेत्र में कार्रवाई, डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों, कनेक्टिविटी और संस्कृति के क्षेत्र में अपनी साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा की। उन्होंने प्रमुख वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। वे ‘मेक इन इंडिया‘ पर अधिक ध्यान केंद्रित करने के साथ रणनीतिक रक्षा सहयोग को और तेज करने पर सहमत हुए। दोनों नेताओं ने अगले साल फ्रांस में आयोजित होने वाले आगामी एआई शिखर सम्मेलन और संयुक्त राष्ट्र महासागर सम्मेलन के संदर्भ में मिलकर काम करते हुए एआई, उभरती हुयी प्रौद्योगिकियों, ऊर्जा और खेल के क्षेत्र में सहयोग का विस्तार करने पर भी सहमती प्रकट की।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक स्थिर और समृद्ध वैश्विक व्यवस्था के लिए भारत और फ्रांस के बीच एक मजबूत और भरोसेमंद रणनीतिक साझेदारी जरूरी है। प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति मैक्रों को आगामी पेरिस ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों के लिए अग्रिम शुभकामनाएं दीं।
इस दौरान श्री मोदी ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक से भी मुलाकात की। उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार के तीसरे कार्यकाल में भारत-ब्रिटेन के बीच अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर अपनी प्रतिबद्वता दोहराई। श्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच सेमीकंडक्टर, प्रौद्योगिकी और व्यापार के क्षेत्र में संबधों को मजबूत करने की काफी संभावनाएं है। दोनों देशों ने रक्षा के क्षेत्र में संबधों को और मजबूत करने पर भी चर्चा की।
प्रधानमंत्री मोदी ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोदिमीर जेलेंस्की से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबधों को मजबूत करने तरीकों पर वार्ता की। इस दौरान यूक्रेन की स्थिति और स्विट्जरलैंड द्वारा शांति के लिए आयोजित होने वाले शिखर सम्मेलन पर भी चर्चा हुई। श्री मोदी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि भारत यूक्रेन के साथ द्विपक्षीय संबधों को मजबूत करने को उत्सुक है। यूक्रेन की वर्तमान स्थिति पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत मानव केंद्रति दृष्टिकोण में विश्वास रखता है और मानता है कि बातचीत और कूटनीति के मध्यम से शांति का रास्ता निकलेगा।