पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय ने इस वर्ष पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास के लिए कई कदम उठाए हैं। मंत्रालय ने क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए आई.आई.टी गुवाहाटी में 22 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से पूर्वोत्तर विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्लस्टर की स्थापना को मंजूरी दी। इस वर्ष नई दिल्ली में राइजिंग नॉर्थ ईस्ट इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन किया गया। इस आयोजन में बड़े कॉरपोरेट घरानों, विदेशी निवेशकों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों ने भाग लिया। मंत्रालय ने बताया कि इस आयोजन से विभिन्न निजी निवेशकों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से चार लाख चालीस हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की उम्मीद है। भावनात्मक जुड़ाव को मजबूत करने, लोगों के बीच संबंधों को गहरा करने और पूर्वोत्तर क्षेत्र की सांस्कृतिक समृद्धि और महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए इस वर्ष नवंबर में अष्टलक्ष्मी दर्शन-युवा विनिमय कार्यक्रम भी शुरू किया गया।
इसके अलावा, मंत्रालय ने बताया कि इस क्षेत्र में बांस आधारित आर्थिक क्षमता को अवसर देने के लिए कौशल विकास, उन्नत बांस उत्पादों के विकास और बाजार संपर्क उपायों सहित समग्र दृष्टिकोण अपनाते हुए एक व्यापक बांस मूल्य-श्रृंखला विकास कार्यक्रम लागू किया जा रहा है। पूर्वोत्तर परिषद की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत, पूर्वोत्तर क्षेत्र में बांस पारिस्थितिकी तंत्र के समग्र विकास के लिए दो सौ तीस करोड़ रुपये से अधिक की 25 बांस क्षेत्र परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं में उद्यम विकास, कारीगरों को सहायता, प्रशिक्षण, बुनियादी ढांचा निर्माण और उत्पाद विविधीकरण शामिल हैं।