पाकिस्तान में मानवाधिकार वकील दंपति इमान मजारी और हादी अली चत्था को दी गई सजा की संयुक्त राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय कानूनी संस्थाओं और देश के मानवाधिकार समूहों ने कड़ी निंदा की है। क्रिश्चियन डेली इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट के अनुसार आलोचकों ने चेतावनी दी है कि यह मामला पाकिस्तान में असहमति और कानूनी पैरवी के दमन में खतरनाक वृद्धि का प्रतीक है। इस दंपति को इस वर्ष जनवरी में इस्लामाबाद की एक सत्र अदालत ने राज्य संस्थाओं की आलोचना करने वाली सोशल मीडिया पोस्ट के लिए पाकिस्तान के इलेक्ट्रॉनिक अपराध निवारण अधिनियम के अन्तर्गत सजा सुनाई थी। मानवाधिकार समूहों और कानूनी पर्यवेक्षकों ने इन सजाओं को राजनीतिक रूप से प्रेरित और मुकदमे को गंभीर रूप से त्रुटिपूर्ण बताया है और देश में नागरिक स्वतंत्रता तथा न्यायिक स्वतंत्रता के सिकुड़ने पर चिंता व्यक्त की है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने दोनों को दी गई सजा पर गहरी चिंता व्यक्त की है। कार्यालय ने कहा है कि शांतिपूर्ण अभिव्यक्ति के लिए आपराधिक दंड अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के अन्तर्गत पाकिस्तान के दायित्वों के विपरीत है। यूरोपीय संघ ने भी इस पर चिंता व्यक्त की है। इंटरनेशनल कमीशन ऑफ ज्यूरिस्ट्स, लॉयर्स फॉर लॉयर्स और इंटरनेशनल बार एसोसिएशन के मानवाधिकार संस्थान सहित अंतरराष्ट्रीय कानूनी संगठनों के एक गठबंधन ने एक संयुक्त बयान में इस दंपत्ति को दी गई सजा की निंदा की है। मजारी और चत्था को दी गई सजा के बाद पाकिस्तान में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं।