बर्लिन में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के एक समूह ने पाकिस्तान के 27वें संवैधानिक संशोधन को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यह संशोधन पाकिस्तान में न्यायिक स्वतंत्रता को कमजोर करेगा और कार्यपालिका को अधिक शक्तियां प्रदान करेगा।
बलूचिस्तान पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, समूह ने कहा कि यह विवादास्पद संशोधन उन नागरिकों के लिए सुरक्षा उपायों को और कम कर देगा जो पहले से ही राजनीतिक रूप से हाशिए पर हैं और मानवाधिकारों के उल्लंघन का सामना कर रहे हैं।
बलूचिस्तान मानवाधिकार परिषद -एचआरसीबी के कार्यकारी निदेशक अब्दुल्ला अब्बास ने कहा कि इस संशोधन से नागरिकों, कार्यकर्ताओं और नागरिक समाज समूहों की कानूनी सहायता प्राप्त करने की क्षमता सीमित हो जाएगी। श्री अब्बास ने कहा कि बलूचिस्तान में इसके परिणाम और भी गंभीर होंगे, जहां मानवाधिकार संगठनों ने लंबे समय से जबरन गायब किए जाने और गैर-न्यायिक हत्याओं की रिपोर्ट की है। एचआरसीबी के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में बलूचिस्तान में 1 हजार 455 लोगों को जबरन गायब किया गया, जबकि 538 लोगों की हत्या कर दी गई।