भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जाति मोर्चा पंजाब के उपाध्यक्ष परमजीत सिंह कैंथ ने हाल में मुंबई में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शताब्दी व्याख्यान समारोह में वीर सावरकर को भारत रत्न दिए जाने के समर्थन में दिए गए भाषण का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि सावरकर के मामले को उनके पूरे ऐतिहासिक रिकॉर्ड के आधार पर देखा जाना चाहिए, जिसमें जातिगत प्रथाओं के खिलाफ उनके सुधारवादी विचार भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सावरकर ने अपने लेखन में हिंदू समाज को विभाजित करने वाली रूढ़िवादी प्रथाओं को समाप्त करने की बात कही है और उन्होंने “सात बंधनों” का उल्लेख किया है, जिनमें अस्पृश्यता, साथ भोजन करने पर प्रतिबंध और अंतरजातीय विवाह पर रोक शामिल हैं, जो जन्म से ही सामाजिक विभाजन को मजबूत करते हैं।
श्री कैंथ ने कहा कि सामाजिक न्याय की राष्ट्रीय मान्यता डॉ. बी. आर. आम्बेडकर की संवैधानिक विरासत से जुड़ी है। उन्होंने याद दिलाया कि केंद्र में भाजपा के समर्थन से आम्बेडकर को 1990 में मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।