श्रम और रोज़गार मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा है कि नए श्रम कानूनों से पश्चिम बंगाल की दार्जिलिंग पहाड़ियों, तराई और डुआर्स क्षेत्र में चाय और सिनकोना मजदूरों के जीवन में बदलाव आएगा। चाय और सिनकोना श्रमिक संघों के नेताओं और हितधारकों के साथ बातचीत में श्री मांडविया ने कहा कि दशकों से इस ऐतिहासिक चाय उत्पादक क्षेत्र में मजदूर औपनिवेशिक काल की पुरानी श्रम प्रथाओं से पीड़ित रहे हैं।
पश्चिम बंगाल सरकार को निशाने पर लेते हुए श्रम मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने चाय और सिनकोना मजदूरों को सम्मानजनक मजदूरी और उनकी पुश्तैनी ज़मीन से वंचित रखा है साथ ही उन्हें बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नही कराई गई। उन्होंने कहा कि नए श्रम कानून यह सुनिश्चित होगा कि किसी भी मजदूर को राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी से कम भुगतान न किया जाए। पश्चिम बंगाल सरकार को भी इसे अनिवार्य रूप से लागू करना होगा।श्री मांडविया उत्तर बंगाल के दो दिन के दौरे पर हैं।