देश में नये आपराधिक कानून एक जुलाई से लागू हो जायेंगे। इसके तहत भारतीय न्याय संहिता 2023 में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों पर कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। 18 वर्श कम उम्र की लड़कियों के खिलाफ अपराध के लिये गंभीर दंड का प्रावधान है, जिसमें सबसे जघन्य कृत्यों के लिये आजीवन कारावास या मौत की सजा षामिल है। बीएनएस की धारा 95 के तहत बच्चों का शोषण दंडनीय अपराध है। ऐसे लोग जो बच्चों को आपराधिक गतिविधियों के लिये नियोजित करते हैं या उन्हें काम पर रखते हैं वे दंड के पात्र हैं।
कानून यह सुनिश्चित करता है कि ऐसे उद्देश्यों के लिये बच्चों को काम पर रखने या नियोजित करने वाले व्यक्ति को सजा मिले। भारतीय न्याय संहिता 2023 की धाराएं 96, 98 और 99 वेश्यावृत्ति के लिये बच्चों की खरीद फरोख्त को दंडनीय बनाती है।
नये कानूनों में बच्चों की तस्करी, अपंगता और आयात के खिलाफ सख्ती से निपटने का प्रावधान है। पीड़ित ई-एफआईआर द्वारा अपराध की रिपोर्ट कर सकते हैं। यह पीड़ितों को कानूनी प्रक्रिया में भयमुक्त होकर भाग लेने को सुनिश्चित करता है इससे संगीन अपराधों की त्वरित सूचना प्राप्त होगी और इन पर त्वरित कार्रवाई हो सकेगी।