दक्षिण एशिया उभरते क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ विकास स्थल बना हुआ है। व्यापारिक चुनौतियों में वृद्धि के बावजूद भारत बाजार के दृष्टिकोण को मजबूती प्रदान कर रहा है। यह विश्व आर्थिक मंच के नवीनतम सर्वेक्षण का एक मुख्य निष्कर्ष है। अगले सप्ताह होने वाली दावोस वार्षिक बैठक के पहले इस निष्कर्ष को जारी किया गया है। मुख्य अर्थशास्त्री आउटलुक का मानना है कि रोजगार पर गतिरोध को कम करके भारत सुधार के मार्ग पर अग्रसर है। इसका कहना है कि अमरीकी प्रौद्योगिकी कंपनियों से निवेश के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की स्वीकृति बढ़ रही है।
रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक आर्थिक आउटलुक में थोड़ा सुधार हुआ है, लेकिन परिसंपत्ति मूल्यांकन, बढ़ते ऋण, भू-आर्थिक समायोजन और तीव्र आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तैनाती से अवसर और जोखिम दोनों के बढ़ने से अनिश्चितताएं बनी हुई हैं। सर्वेक्षण में शामिल लगभग 53 प्रतिशत प्रमुख अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि आने वाले वर्ष में वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां कमजोर होंगी। वहीं पिछले साल सितंबर महीने में यह राय रखने वाले 72 प्रतिशत लोग इस श्रेणी में थे। प्रौद्योगिकी को लेकर अधिक अनिश्चितता बनी हुई है। 52 प्रतिशत लोग अमरीका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संबंधित शेयरों में गिरावट आने और 40 प्रतिशत लोग इसमें वृद्धि होने की आशा कर रहे हैं।
वृद्धि को लेकर अपेक्षाएं क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हैं। अर्थशास्त्री यूरोप में कमजोर से मामूली वृद्धि तथा दक्षिण एशिया और पूर्वी एशिया में विकास में तीव्र गति की आशा कर रहे हैं। दो तिहाई प्रमुख अर्थशास्त्रियों के सर्वेक्षण के अनुसार दक्षिण एशिया क्षेत्रीय विकास परिदृश्य के शीर्ष पर लौट चुका है।