झारखंड में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण की विशेष अदालत ने प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया(पीएलएफआई) के खिलाफ एक बड़ी कानूनी कार्रवाई की है। अदालत ने इस संगठन के छह सक्रिय सदस्यों को आतंकवाद, अवैध हथियार रखने और जबरन वसूली से संबंधित मामले में 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने गुलाब कुमार यादव, रवि यादव, राकेश कुमार पासवान, पवन कुमार यादव, संतोष यादव और सुरेश यादव को कानून की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया है।
यह मामला दिसंबर 2018 में लातेहार जिले के बालूमाथ इलाके में हुई छापेमारी से संबंधित है, जहां पर हथियार और गोला-बारूद बरामद किया गया था। इसके बाद राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण ने जून 2019 में जांच अपने हाथ में ली थी और फरवरी 2020 में आरोप पत्र दायर किया। जांच में यह पाया गया कि संतोष यादव ने एक सब-ज़ोनल कमांडर के रूप में काम किया था, जबकि सुरेश यादव ने भर्ती, परिचालन गतिविधियों और अवैध हथियारों की आपूर्ति में सहायता पहुंचाई।