जल शक्ति मंत्रालय के सचिव वी. एल. कांता राव ने जलवायु परिवर्तन के युग में सटीक जल संरक्षण योजना के लिए विश्वसनीय आंकड़ों के महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि सटीक जानकारी प्राप्त करने के लिए आधुनिक सेंसरों का उपयोग समय की आवश्यकता बन गया है। वे आज पुणे के केंद्रीय जल और विद्युत अनुसंधान केंद्र में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला “प्रेसीसेंस 2026” के उद्घाटन के अवसर पर बोल रहे थे।
कार्यशाला का मुख्य विषय जलमापी और मौसम विज्ञान उपकरणों की सटीकता और परीक्षण है। श्री राव ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से वर्षा के तरीके में बदलाव आया है। इससे बाढ़ नियंत्रण और जल संसाधन योजना के लिए वास्तविक समय के आंकड़े प्रदान करने वाले सटीक उपकरणों की स्थापना आवश्यक हो गई है। उन्होंने जल क्षेत्र में उपयोग किए जाने वाले उपकरणों के निर्माण में आत्मनिर्भरता का आह्वान किया। उन्होंने स्वदेशी उपकरणों का वैश्विक मानकों के अनुरूप परीक्षण करने की आवश्यकता पर बल दिया।
भविष्य की चुनौतियों के बारे में उन्होंने कहा कि बढ़ती जनसंख्या और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए पारंपरिक जल प्रबंधन पद्धतियों से स्मार्ट और डिजिटल जल प्रबंधन की ओर बदलाव अपरिहार्य है। उन्होंने राज्य के जल संसाधन विभागों से आग्रह किया कि वे पुरानी पद्धतियों को आधुनिक डिजिटल प्रौद्योगिकियों और स्वचालन से बदलें।
इस कार्यशाला का आयोजन केंद्रीय जल और विद्युत अनुसंधान केंद्र और भारतीय जल विज्ञान सोसायटी द्वारा संयुक्त रूप से जल क्षेत्र में आंकड़ों की गुणवत्ता में सुधार लाने के उद्देश्य से किया गया है।