केन्द्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में चार साल बाद दरबार स्थानांतरण की द्विवार्षिक परम्परा फिर शुरू कर दी गई है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आज इसकी बहाली की घोषणा की। जम्मू में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, श्री अब्दुल्ला ने कहा कि राज्य मंत्रिमंडल ने सदियों पुरानी इस परंपरा को फिर से शुरू करने की मंज़ूरी दे दी है। उपराज्यपाल ने भी इसे स्वीकृत कर लिया है। सरकार का यह निर्णय जम्मू-कश्मीर की सबसे पुरानी प्रशासनिक परंपराओं की वापसी का प्रतीक है।
दरबार स्थानांतरण की प्रथा, जम्मू और कश्मीर दोनों क्षेत्रों में प्रशासनिक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए वर्ष 1872 में महाराजा गुलाब सिंह ने शुरू की थी। इसके अंतर्गत मौसम बदलने पर राजधानी को जम्मू और श्रीनगर के बीच स्थानांतरित किया जाता है। वर्ष 2021 में उपराज्यपाल प्रशासन ने इस परम्परा पर रोक लगा दी थी।
अपनी पार्टी के अध्यक्ष सैयद अल्ताफ़ बुखारी ने पारंपरिक द्विवार्षिक दरबार स्थानांतरण को फिर से शुरू करने के सरकार के फ़ैसले की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह जम्मू-कश्मीर की ऐतिहासिक विरासत और सामाजिक-सांस्कृतिक ताने-बाने को संरक्षित करता है।