गृह मंत्री अमित शाह ने आज अगरतला में पूर्वी, उत्तर-पूर्वी और उत्तरी क्षेत्रों के लिए संयुक्त क्षेत्रीय राजभाषा सम्मेलन का उद्घाटन किया। यह सम्मेलन राजभाषा विभाग ने आयोजित किया था। गृह मंत्री ने कहा कि त्रिपुरा में हिंदी, बंगाली और कोकबोरोक भाषाएँ धाराप्रवाह बोली जाती हैं और राज्य में भाषा को लेकर कभी कोई विवाद नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि यह माता त्रिपुरा सुंदरी की पवित्र भूमि है। श्री शाह ने कहा कि यह न केवल त्रिपुरा या उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रमुख आकर्षण है। गृह मंत्री ने कहा कि हिंदी आंदोलन की नींव छत्रपति शिवाजी महाराज के समय में रखी गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वराज का अर्थ स्वराज, स्वाभाषा और स्वधर्म है।
गृह मंत्री ने कहा कि देवनागरी लिपि के माध्यम से दो हजार से अधिक बोलियों को संरक्षित किया जा रहा है, इसलिए इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि त्रिपुरा अष्टलक्ष्मी का अभिन्न अंग है, जो उत्तर-पूर्वी क्षेत्र की सांस्कृतिक और विकासात्मक शक्ति का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद केंद्र ने उत्तर-पूर्वी राज्यों के साथ 21 समझौते किए हैं और 11 हजार से अधिक युवाओं ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में प्रवेश किया है।
उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में पर्यटन और निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और प्रधानमंत्री ने पूर्वोत्तर को संघर्ष से विकास की ओर अग्रसर किया है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर के दिग्गज गायकों और संगीतकारों जैसे भूपेन हजारिका, एसडी बर्मन, आरडी बर्मन और जुबीन गर्ग के संगीत के माध्यम से हिंदी का देश भर में प्रसार हुआ, जिनकी रचनाओं ने हिंदी को वैश्विक श्रोताओं तक पहुंचाया। इस अवसर पर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार, मुख्यमंत्री माणिक साहा और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।