फ़रवरी 23, 2026 10:24 अपराह्न

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गृहिणी का श्रम पति को कार्य में सक्षम बनाता है; भरण-पोषण तय करते समय योगदान की अनदेखी अन्यायपूर्ण: दिल्ली उच्च न्यायालय

दिल्‍ली उच्‍च न्‍यायालय ने  पत्‍नी की धारणा को खारिज करते हुए कहा है कि गृहिणी का श्रम कमाने वाले पति को प्रभावी ढंग से कार्य करने में सक्षम बनाता है, और भरण-पोषण तय करते समय उसके योगदान की अनदेखी करना अन्यायपूर्ण है। न्‍यायमूर्ति स्‍वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि भरण पोषण भत्‍ते का निर्धारण करते समय एक पत्‍नी की बेरोजगारी को आलस्य या जानबूझकर निर्भरता के बराबर नहीं माना जा सकता है। दिल्‍ली उच्‍च न्‍यायालय ने कहा कि विवाह वृत्ति के दौरान कानून को न सिर्फ पत्‍नी को वित्तीय आय की स्‍वीकृति देनी चाहिए बल्कि घर और घरेलू संबंध में उसके योगदान की आर्थिक कीमत भी निर्धारित की जानी चाहिए।

 न्‍यायालय ने कहा कि बिना कमाने वाली पत्‍नी की अवधारणा निरर्थक है। यह घरेलू योगदान में गलतफहमी का परिचायक है। न्‍यायालय ने ये टिप्पणियां पिछले सप्ताह घरेलू हिंसा से महिलाओं की सुरक्षा अधिनियम के तहत अलग रह रही पत्नी को भरण-पोषण देने के मामले पर सुनवाई करते हुए कीं।