विश्व के सबसे बड़े वार्षिक खाद्य और पेय आयोजन गल्फफूड में पहली बार भारत भागीदार देश के रूप में शामिल होने के कारण दुबई वैश्विक प्रदर्शनी इतिहास रच रहा है। यह दो विशाल स्थलों पर एक साथ आयोजित होने वाली पहली प्रदर्शनी बन गई है। 26 से 30 जनवरी, 2026 तक चलने वाला यह आयोजन दुबई वर्ल्ड ट्रेड सेंटर और एक्सपो सिटी दुबई के नव विस्तारित दुबई प्रदर्शनी केंद्र में आयोजित किया जाएगा।
गल्फफूड 2026 में भारत की भागीदारी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इसमें एक सौ 61 प्रदर्शक देश के विविध कृषि-खाद्य पारिस्थितिकी तंत्र का प्रदर्शन करेंगे। भारतीय मंडप का आकार पिछले वर्ष की तुलना में दोगुना हो गया है। यह भारतीय कृषि-खाद्य निर्यात के बढ़ते प्रभाव, भारतीय उत्पादों की बढ़ती वैश्विक मांग और निर्यातकों, संस्थानों और स्टार्टअप्स की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है।
भारत की भागीदारी का एक प्रमुख आकर्षण भारती मंडप है। यह निर्यात के लिए तैयार कृषि-खाद्य और कृषि-तकनीक स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण-एपीडा की प्रमुख पहल है। दुबई वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के स्टार्टअप जोन में स्थित इस मंडप में आठ उच्च क्षमता वाले भारतीय स्टार्टअप प्रदर्शित किए गए हैं। इन्हें एक सौ से अधिक आवेदकों में से राष्ट्रीय स्तर की प्रक्रिया के माध्यम से चुना गया है।
गल्फफूड 2026 के दोनों आयोजन स्थलों पर 2 लाख 80 हजार वर्ग मीटर से अधिक का आयोजन स्थल पूरी तरह से बुक हो चुका है। यह एक वर्ष में अभूतपूर्व सौ प्रतिशत विस्तार दर्ज करता है। दोनों स्थानों पर भारत की मजबूत उपस्थिति है।
दुबई प्रदर्शनी केंद्र में वर्ल्ड फूड हॉल, दालें, अनाज और अनाज हॉल और गल्फफूड ग्रीन का आयोजन किया गया है। यह स्थिरता, नवाचार और भविष्य की खाद्य प्रणालियों पर केंद्रित है। दुबई वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में बेवरेज हॉल और स्टार्टअप हॉल का आयोजन किया गया है। इसमें भारती मंडप भी शामिल है।
गल्फफूड के आयोजक, दुबई वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की कार्यकारी उपाध्यक्ष और काउन इंटरनेशनल की मुख्य कार्यकारी अधिकारी, ट्रिक्सी लोहमिरमंद ने कहा- यह गल्फफूड, दुबई और वैश्विक खाद्य तथा पेय उद्योग के लिए एक विश्व-रिकॉर्ड क्षण है। इस आयोजन में 195 देशों के 8 हजार 5 सौ से अधिक प्रदर्शक 15 लाख उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे हैं। इनमें से 40 प्रतिशत प्रदर्शक पहली बार शामिल हुए हैं। भारत, मिस्र, सऊदी अरब, तुर्की और अमरीका सहित प्रमुख उत्पादक बाजारों से अब तक की सबसे बड़ी राष्ट्रीय भागीदारी हो रही है।