केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने 2024 के राष्ट्रीय भू-जल मूल्यांकन के अनुसार कल 124 से अधिक उपयोग में लाए गए और संकटग्रस्त भू-जल जिलों में प्रगति की समीक्षा की। जल शक्ति मंत्रालय ने कहा कि इस समीक्षा में जल संचय जन भागीदारी टू पॉइंट ज़ीरो के अंतर्गत हुई प्रगति पर ध्यान केंद्रित किया गया। इसका उद्देश्य अगले वर्ष 31 मई तक एक करोड़ कृत्रिम जलाशयों और भंडारण संरचनाओं का सृजन करना है। इस बैठक में दीर्घकालिक जल सुरक्षा और स्रोतों की निरंतरता को सशक्त बनाने के लिए जल संरक्षण प्रयासों में तेजी लाने पर भी बल दिया गया। इन जिलों को वैज्ञानिक व्यवहार्यता वाले मानचित्रों का उपयोग करने, केंद्रीय भू-जल बोर्ड के तकनीकी समर्थन और तीव्र कार्यवान्यवन के लिए योजनाओं के समन्वय के बारे में भी मार्गदर्शन दिया गया।
श्री पाटिल ने अपने संबोधन में कहा कि इस योजना के अंतर्गत अत्यधिक उपयोग में लाए गए और संकटग्रस्त खंडों में मनरेगा कोष के 65 प्रतिशत हिस्से को जल संबंधी कार्यों के लिए निर्धारित किया गया है। श्री पाटिल ने बताया कि मनरेगा के अंतर्गत अब विशेष रूप से अत्यधिक उपयोग में लाए गए, संकटग्रस्त और अर्ध-संकटग्रस्त जिलों को 15 अतिरिक्त जल संरक्षण और भू-जल जलाशयों की अनुमति दी गई है।