हिमाचल प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध पर्यटन शहर कुल्लू में, राज्य सरकार अपनी पर्यावरण-पर्यटन पहल के अंतर्गत कुल्लू जिले के अनछुए पर्यटन स्थलों का विकास कर रही है। इसके लिए कुल्लू सर्कल वन विभाग ने 16 से अधिक पर्यावरण-पर्यटन स्थलों की पहचान की है। इनमें से पांच स्थलों का आवंटन खुली नीलामी से किया गया है। इन स्थलों को एक हेक्टेयर वन भूमि पर पर्यटन सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
कुल्लू जिले में कैस धार, सोलांग नाला, कसोल, सुमारोपा और खीरगंगा-बिन्द्रवानी जैसे स्थल वन विभाग के लिए लगभग डेढ करोड़ रुपये का वार्षिक राजस्व उत्पन्न कर रहे हैं। इसके अलावा नौ और पर्यावरण-पर्यटन स्थलों की भी पहचान की गई है।
राज्य सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए इन पर्यावरण-पर्यटन स्थलों का विकास कर रही है। इस पहल से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। पर्यावरण-पर्यटन स्थलों की नीलामी 10 वर्षों की अवधि के लिए की जा रही है, जिसे अधिकतम पांच वर्षों तक बढ़ाया जा सकता है।