मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई ने कहा कि कानून या संविधान की व्याख्या, व्यवहारिक होनी चाहिए। इनकी व्याख्या इस तरह से की जानी चाहिए जो समाज की आवश्यकताओं के अनुरूप हो। बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा आयोजित अपने सम्मान समारोह में उन्होंने कहा कि कुछ सहकर्मियों के अनुचित व्यवहार को लेकर हाल ही में उन्हें शिकायत मिली। उन्होंने न्यायाधीशों से इस संस्थान की प्रतिष्ठा की रक्षा करने का आग्रह किया।
मुख्य न्यायाधीश ने बॉम्बे उच्च न्यायालय की सराहना करते हुए कहा कि वहां वे एक अधिवक्ता के रूप में कभी प्रैक्टिस किया करते थे तथा एक न्यायाधीश के रूप में अपनी सेवाएं दीं। उन्होंने कहा कि जब लोग उनके फैसलों की सराहना करते हैं तो उन्हें गौरव का अनुभव होता है। मुख्य न्यायाधीश ने न्यायाधीशों से अपनी शपथ और वचनबद्धता के प्रति सत्यनिष्ठ रहने का भी आग्रह किया।
यह कार्यक्रम कॉलेज के प्रोफेसर और प्राचार्य के रूप में भारत रत्न डॉक्टर बाबा साहेब आम्बेडकर के कार्यकाल की 90वीं वर्षगांठ का प्रतीक था। इस अवसर की स्मृति में एक स्मारक पट्टिका का अनावरण किया गया और मुख्य न्यायाधीश गवई के सम्मान में सम्वर्धना कार्यक्रम का आयोजन किया गया। गणमान्य अतिथियों ने डॉक्टर आम्बेडकर के जीवन और कार्य को प्रदर्शित करने वाली चित्र प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम के दौरान सरकारी विधि कॉलेज ने मुख्य न्यायाधीश गवई को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। कई अन्य संगठनों और गणमान्य व्यक्तियों ने भी अपनी शुभकामनाएं दीं।