उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि ए.आई., स्वचालन, जैव प्रौद्योगिकी और डिजिटल संपर्क जीवन के हर पहलू को नया आकार दे रही है। उन्होंने कहा कि लोगों को प्रौद्योगिकी के प्रति उत्साह और नैतिक सतर्कता दोनों के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उपराष्ट्रपति ने युवा स्नातकों को आगाह किया कि डिजिटल उपकरण, उत्पादकता और संपर्क को बढ़ा सकते हैं, लेकिन उन्हें गहन चिंतन और समाज के साथ सार्थक जुड़ाव की क्षमता को कम करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
पांडिचेरी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति सी.पी. राधाकृष्णन विश्वविद्यालय के 30वें दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता कर रहे थे। श्री राधाकृष्णन ने अपने संबोधन में स्नातकों से राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के राजदूत बनने तथा इसके जिज्ञासा, नवाचार और समावेशी उत्कृष्टता की भावना को आगे बढ़ाने का आग्रह किया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति को एक महत्वपूर्ण बदलाव बताते हुए उन्होंने कहा कि यह शिक्षा को आलोचनात्मक चिंतन की ओर, बहुविषयक शिक्षा की ओर और समग्र विकास की ओर ले जाती है। युवाओं को विकसित भारत का निर्माता बताते हुए उपराष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि विकास तभी सार्थक हो सकता है जब वह समाज के सभी वर्गों को शामिल करे। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने विश्वविद्यालय परिसर में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र और सौ फीट ऊंचे ध्वज स्तंभ का भी उद्घाटन किया।