संयुक्त अरब अमीरात द्वारा दो अरब डॉलर के ऋण को एक महीने के लिए स्थगित करने के कारण पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर वित्तीय दबाव बढ गया है। इससे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को गंभीर संरचनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
इस अल्पकालिक विस्तार से यह बात स्पष्ट होती है कि इस्लामाबाद को दिवालिया होने से बचने के लिए संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और चीन जैसे सहयोगियों पर कितना निर्भर रहना पड़ता है। वित्त वर्ष 2025-26 में पाकिस्तान को 23 से 26 अरब डॉलर के बाहरी ऋण का भुगतान करना होगा।
आर्थिक विकास दर लगभग तीन प्रतिशत पर धीमी बनी हुई है। यह तेजी से बढ़ती कार्यबल की जरूरतों को पूरा करने में असमर्थ है। इससे बेरोजगारी दर लगभग सात प्रतिशत तक पहुंच गई है, जिसमें युवा बेरोजगारी दर और भी अधिक है। ऊर्जा की बढ़ती कीमतें, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की शर्तों के तहत बढ़े हुए कर और प्राकृतिक आपदाएं इस संकट को और भी गंभीर बना रही हैं।