उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर अपनी शुभकामनाएं दी हैं। एक सोशल मीडिया पोस्ट में श्री राधाकृष्णन ने कहा कि 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा आरएसएस की स्थापना के बाद यह संगठन युवाओं को सशक्त चरित्र विकसित करने और समाज की स्वैच्छिक सेवा करने के लिए प्रेरित करता रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य लोगों की निस्वार्थ सेवा करने के प्रति सेवा परमो धर्म की भावना से प्रेरित रहे हैं।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि आरएसएस धर्म, जाति और भाषा से ऊपर उठकर सभी को अपनाया है। आरएसएस ने अपने समावेशी दृष्टिकोण के जरिए राष्ट्र की समग्र प्रगति में योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि वो दिन दूर नहीं जब भारत विश्व में एक सर्वोच्च राष्ट्र के रूप में उभर कर सामने आएगा। इसमें आरएसएस की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। संघ के सौ वर्ष पूरे करने को लेकर उन्होंने समाज की सेवा करने और एकता, समरसता और प्रगति को और सुदृढ़ बनाने में इसकी सतत भूमिका का उल्लेख किया।