फ़रवरी 28, 2026 2:00 अपराह्न

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उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने दिल्ली विश्वविद्यालय के 102वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि आत्मनिर्भरता का अर्थ है नवाचार, उत्पादन, अनुसंधान और समाधान करने की क्षमता।

दिल्ली विश्वविद्यालय के 102वें दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति ने विश्वविद्यालयों से अनुसंधान, उद्यमिता और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों के केंद्र बनने का आह्वान किया।

उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि विकसित भारत का अर्थ है समावेशी विकास, तकनीकी नेतृत्व, सामाजिक सद्भाव, पर्यावरण में स्थिरता और पारदर्शी तथा जवाबदेह संस्थान।

श्री राधाकृष्णन ने छात्रों की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे 2047 के भारत को आकार देंगे। उन्होंने कहा कि छात्रों की ईमानदारी, योग्यता, करुणा और नवाचार की भावना पर आत्मनिर्भर और विकसित भारत का लक्ष्‍य निर्भर करता है।

श्री राधाकृष्णन ने पचास प्रतिशत से अधिक स्नातक और 70 प्रतिशत से अधिक स्वर्ण पदक विजेता छात्राओं की उपलब्धि पर प्रसन्‍नता व्‍यक्‍त की।     उन्‍होंने इसे देश में महिला शिक्षा की अभूतपूर्व वृद्धि का प्रतिबिंब बताया।

उपराष्ट्रपति ने स्नातक छात्राओं से जिज्ञासा की भावना को आगे बढ़ाने और सीखने की प्रक्रिया को लगातार बनाए रखने का आग्रह किया। उन्होंने अवसरों के लिए आभारी और जिम्मेदारियों के प्रति सचेत रहने का आह्वान किया।

दीक्षांत समारोह में एक लाख बीस हजार से अधिक विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की गई।  इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने कहा कि स्नातक छात्रों की कुल संख्या कई देशों की जनसंख्या से अधिक है, यह विश्वविद्यालय की विशाल शैक्षणिक उपस्थिति को दर्शाती है।

 

 

 

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