उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में सेवा आचरण नियमावली में संशोधन किया है। मंत्रिमंडल की कल हुई बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार, अगर कोई सरकारी कर्मचारी एक कैलेंडर वर्ष में अपने छह महीने के मूल वेतन से अधिक की राशि शेयरों, स्टॉक या अन्य निवेश माध्यमों में लगाता है तो इसकी जानकारी सक्षम प्राधिकारी को देना अनिवार्य होगा। पहले यह सीमा मूल वेतन के एक महीने के बराबर थी।
इन परिवर्तनों का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों के निवेश और संपत्तियों से संबंधित मामलों में अधिक पारदर्शिता लाना है। इसके अलावा, अचल संपत्ति की घोषणा से संबंधित नियम में भी संशोधन किया गया है। पहले, सरकारी कर्मचारियों को अपनी अचल संपत्ति का विवरण हर पांच साल में एक बार देना होता था। अब, उन्हें यह जानकारी हर साल देनी होगी।