विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने अपनी पिछली बातचीत में पोत-परिवहन और भारत की ऊर्जा सुरक्षा से जुडे मुद्दों पर चर्चा की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने आज नई दिल्ली में संवाददाता सम्मेलन में बताया कि दोनों नेताओं के बीच पिछले कुछ दिनों में तीन बार वार्ता हो चुकी है। श्री जायसवाल ने बताया कि ईरान में लगभग 9 हजार भारतीय नागरिक हैं और भारत सरकार ने तेहरान से कई भारतीयों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। सरकार अजरबैजान और आर्मेनिया के रास्ते ईरान छोड़ने के इच्छुक लोगों को वीजा और जमीनी सीमा पार करने में सहायता कर रही है ताकि वे वाणिज्यिक उड़ानों से वापस आ सकें।
श्री जायसवाल ने बताया कि संघर्ष शुरू होने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खाड़ी क्षेत्र के कई नेताओं से बात की है। इन वार्ताओं में श्री मोदी ने शीघ्र शांति बहाल करने के लिए संवाद और कूटनीति की आवश्यकता पर बल दिया। श्री जायसवाल ने नागरिकों की सुरक्षा की आवश्यकता पर बल दिया।
बांग्लादेश को पेट्रालियम उत्पाद भेजे जाने पर श्री जायसवाल ने कहा कि भारत विशेष रूप से अपने पडोसी देशों को रिफाईंड पेट्रोलियम उत्पादों का प्रमुख उत्पादक है। उन्होंने कहा कि भारत को बांग्लादेश से डीजल की आपूर्ति का अनुरोध मिला था जिसका आकलन किया जा रहा है। बांग्लादेश के साथ जन-केंद्रित और विकास उनमुख दृष्टिकोण संबंधों पर श्री जायसवाल ने कहा कि भारत 2007 से असम में नुमालीगढ़ रिफाईनरी से जल और रेल तथा बाद में भारत-बांग्लादेश मित्रता पाइपलाईन के माध्यम से डीजल की आपूर्ति कर रहा है। अक्तूबर 2017 में हाईस्पीड डीजल की आपूर्ति के लिए नुमालीगढ़ रिफाईनरी और बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोंरेशन के बीच परसपर शर्तों पर एक बिक्री-खरीद समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। उन्होंने बताया कि 2007 से बांग्लादेश को डीजल का निर्यात काफी हद तक जारी है। पेट्रालियम उत्पाद के निर्यात करने में निर्णय लेते समय भारत की रिफाईनिंग क्षमता और अपनी जरूरतों तथा डीजल उपलब्धता को ध्यान में रखा जाएगा। श्री जायसवाल ने कहा कि भारत को श्रीलंका और मॉलदीव से भी ऐसे अनुरोध मिले हैं जिनपर भारत की अपनी ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाएगा।
श्री जायसवाल ने बताया कि विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने भारत सरकार कि ओर से ईरानी दूतावास में शोक पुस्तिका में हस्ताक्षर किए थे। उन्होंने बताया कि विदेश सचिव ने हस्ताक्षर 5 मार्च को ही कर दिए थे जब इस पुस्तक को पहले दिन हस्ताक्षर के लिए रखा गया था।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में खाडी सहयोग परिषद के नेतृत्व वाले एक संकल्प के बारे में श्री जायसवाल ने कहा कि भारत इस प्रस्ताव का सह-प्रायोजक है। उन्होंने बताया कि 135 देश इस विशेष संकलप के सह-प्रायोजक हैं। इसमें बताया गया है कि परिषद देशों में बडी संख्या में भारतीय समुदाय है और उनकी सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने भारत की ऊर्जा सुरक्षा जरूरतों के बारे में खाडी देशों के महत्व पर भी जोर दिया।
भारत-कनाडा समझौते पर पाकिस्तान के बयान को लेकर श्री जायसवाल ने कहा कि भारत इसे खारिज करता है। उन्होंने कहा कि परमाणु अप्रसार के बारे मे भारत की विश्वसनीयता वैश्विक स्तर पर बेदाग है। उन्होंने कहा कि एक ऐसा देश जिसका गुप्त तरीके से परमाणु प्रसार करने का इतिहास रहा है, वो परमाणु प्रसार के जोखिमों और निर्यात नियंत्रण के बारे में किसी को नैतिकता का पाठ नहीं पढा सकता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान द्वारा ऐसी बयानबाजी अपनी खराब छवी से केवल ध्यान भटकाने की कोशिश है।