स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने आज नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान “सार्वजनिक स्वास्थ्य पर प्रभाव के लिए एआई का विस्तार: सार्वजनिक-निजी भागीदारी” विषय पर एक उच्च स्तरीय पैनल चर्चा का आयोजन किया। इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति ने सभी नागरिकों के लिए स्वास्थ्य और कल्याण के उच्चतम संभव मानक को प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन स्वास्थ्य के लिए एक मजबूत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के रूप में विकसित हो चुका है, जिसमें 859 मिलियन से अधिक आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन खाते 878 मिलियन से अधिक स्वास्थ्य अभिलेखों से जुड़े हुए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि देश भर में एक लाख 80 हजार से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर कार्यरत हैं, और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा स्तर पर डिजिटल प्लेटफॉर्म को एकीकृत किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि एआई-सहायता प्राप्त क्लिनिकल डिसीजन सपोर्ट सिस्टम द्वारा संचालित ई-संजीवनी ने 22 लाख से अधिक पंजीकृत स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के माध्यम से 449 मिलियन से अधिक टेलीकंसल्टेशन को सक्षम बनाया है, जिससे यह प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा में विश्व की सबसे बड़ी टेलीमेडिसिन पहल बन गई है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सीईओ डॉ. सुनील कुमार बरनवाल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-एआई स्वास्थ्य सेवा वितरण में दक्षता को काफी हद तक बढ़ा सकती है और विशेष रूप से बड़े पैमाने पर सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में त्वरित, डेटा-आधारित निर्णय लेने में सक्षम बना सकती है।