सरकार ने आयकर नियम, 2026 अधिसूचित कर दिए हैं। ये नियम, पहली अप्रैल से प्रभावी होंगे। नए नियमों का उद्देश्य अनुपालन को बढ़ाना और नियमों की संख्या कम करके कर प्रक्रियाओं को सरल बनाना है।
वित्त मंत्रालय ने कहा है कि ये नियम, आयकर अधिनियम, 2025 के प्रावधानों को लागू करते हैं, पुरानी प्रक्रियात्मक प्रणालियों को प्रतिस्थापित करते हैं और अद्यतन परिभाषाओं, अनुपालन संरचनाओं और नए ढांचों को शामिल करते हैं।
नए नियमों के तहत, कंपनियों को शेयर रजिस्टर रखने, आम बैठकें आयोजित करने और लाभांश का भुगतान केवल देश के भीतर ही करना होगा।
इससे, लाभांश वितरण पर घरेलू नियंत्रण मजबूत होगा। मंत्रालय ने बताया कि आयकर नियम, 2026 ने स्टॉक एक्सचेंज अनुपालन को भी मजबूत किया है।
स्टॉक एक्सचेंजों को अब सात वर्षों तक ऑडिट ट्रेल बनाए रखना, लेनदेन रिकॉर्ड को हटाने से रोकना और पारदर्शिता और डेटा में सुधार के लिए संशोधित लेनदेन पर मासिक रिपोर्ट प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
नए नियमों के तहत कर वसूलने से जुड़े प्राधिकरणों को अतिरिक्त शक्तियां भी प्रदान की गई हैं। कर वसूलने वाले निकाय, अनिवासी आय में कमी के लिए, प्रतिशत आधार, वैश्विक लाभ अनुपात या किसी अन्य उचित विधि का उपयोग करके आय का अनुमान लगा सकते हैं।
आयकर नियम, 2026 ने डिबेंचर रूपांतरण, परिसंपत्तियों के लिए आय प्रकटीकरण योजनाएं और सीमा पार पुनर्गठन जैसे जटिल मामलों के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश पेश किए हैं।
नियामक निरीक्षण को बढ़ाने के लिए शून्य कूपन बांड ढांचा पेश किया गया है, नई अनुमोदन प्रणाली के तहत जारी करने से 3 महीने पहले आवेदन, दो एजेंसियों से निवेश-योग्य रेटिंग और निधि उपयोग की निर्धारित समयसीमा अनिवार्य है।
मंत्रालय ने कहा कि नियोक्ता द्वारा प्रदान किए गए आवास के लिए, छूट अब शहर की जनसंख्या, वेतन स्तर और स्वामित्व या पट्टे की स्थिति जैसे मानदंडों के आधार पर निर्धारित की जाएगी।
आयकर नियम, 2026 का उद्देश्य कराधान प्रणाली में पारदर्शिता, डिजिटलीकरण और मानकीकरण को बढ़ाना है।