सर्वोच्च न्यायालय ने आज डिजिटल युग में जांचकर्ताओं के सामने आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों को रेखांकित करते हुए कहा कि तलाशी और जब्ती से पहले पूर्व सूचना देने से जांच शुरू होने से पहले ही विफल हो सकती है।
सर्वोच्च न्यायालय आयकर अधिनियम की धारा 132 के अन्तर्गत तलाशी और जब्ती शक्तियों के दायरे को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था। इसमें अधिकारियों द्वारा इन शक्तियों के दुरुपयोग की आशंका जताई गई थी। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि अग्रिम सूचना देने से जांच का मूल उद्देश्य ही विफल हो सकता है, क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य आसानी से नष्ट किए जा सकते हैं।