सर्वोच्च न्यायालय ने सोशल मीडिया पर फर्जी और भ्रामक सामग्री से संबंधित सूचना प्रौद्योगिकी नियमों में 2023 में किए गए संशोधनों को रद्द करने वाले बम्बई उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली केंद्र सरकार की याचिका पर विचार करने की सहमति दे दी है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता में तीन न्यायाधीशों की पीठ ने स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया और एसोसिएशन ऑफ इंडियन मैगजीन्स सहित मूल याचिकाकर्ताओं को नोटिस जारी किए। हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय ने 2024 के बम्बई उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसमें संशोधित नियमों को असंवैधानिक घोषित किया गया था। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि पूरे मामले पर अंतिम निर्णय बेहतर होगा।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार का इरादा सामग्री को पूरी तरह से अवरुद्ध करना नहीं था, बल्कि गलत सूचना को विनियमित करना था। अप्रैल 2023 में मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता नियम, 2021 के अंतर्गत पेश किए गए संशोधनों में सरकारी गतिविधियों से संबंधित फर्जी या भ्रामक सामग्री की पहचान करने के लिए एक तथ्य जांच इकाई स्थापित करने का प्रस्ताव था।
सर्वोच्च न्यायालय उचित समय आने पर इस मामले की सुनवाई करेगा।