अमरीकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप के टैरिफ को अवैध घोषित किए जाने के बाद बांग्लादेश के अर्थशास्त्रियों और व्यापारिक नेताओं ने सरकार से अमरीका के साथ हुए समझौते पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।
अमरीका के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पहले लगाए गए आपातकालीन टैरिफ को गैरकानूनी घोषित किए जाने के बाद यह बहस तेज हो गई है, जिससे 9 फरवरी को हस्ताक्षरित बांग्लादेश-अमरीकी पारस्परिक व्यापार समझौते -ए.आर.टी पर अनिश्चितता छा गई है।
अधिकारियों ने कहा कि सरकार इस समझौते की स्थिति साफ करने के लिए वाशिंगटन से औपचारिक स्पष्टीकरण मांगने की योजना बना रही है।
वाणिज्य सचिव महबूबुर रहमान ने संकेत दिया कि नीति निर्माता आगे की रणनीति पर विचार कर रहे हैं और इस संबंध में जल्द ही एक पत्र भेजा जा सकता है।
इस समझौते की पहले से ही आलोचना हो रही थी क्योंकि इस पर राष्ट्रीय चुनावों से कुछ ही दिन पहले हस्ताक्षर किया गया था और इसके अंतर्गत बांग्लादेश ने 19 प्रतिशत तक पूरक शुल्कों में मामूली कमी के बदले बड़े पैमाने पर आयात प्रतिबद्धताएं स्वीकार की थी।
विश्लेषकों का कहना है कि कृषि उत्पादों, द्रवीकृत प्राकृतिक गैस और विमानों की बढ़ी हुई खरीद सहित ये रियायतें संभावित निर्यात लाभों से अधिक हो सकती हैं।
बुनाई उद्योग और चैंबर नेताओं सहित व्यावसायिक संगठनों ने इस समझौते को “असंतुलित” बताया और चेतावनी दी कि अगर अमरीका उत्पादों को व्यापक बाज़ार पहुँच मिलती है, तो स्थानीय उद्योगों विशेष रूप से छोटे निर्माताओं और मुर्गी पालन उत्पादकों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
कई लोगों का कहना है कि बांग्लादेश को अभी भी अमरीका के साथ संरचित व्यापार व्यवस्थाओं को जारी रखना चाहिए ताकि देश के सबसे कम विकसित देश की स्थिति से बाहर निकलने की तैयारी के दौरान दीर्घकालिक बाज़ार पहुँच सुनिश्चित हो सके।
हालांकि, वाणिज्य मंत्रालय ने समझौते का बचाव करते हुए कहा कि विशेष रूप से कपास आधारित परिधानों से जुड़े प्रावधान अनुकूल हैं और मौजूदा अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के अनुरूप हैं।