लोकसभा ने खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2025 पारित कर दिया है। यह विधेयक खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 में संशोधन करेगा। विधेयक में प्रावधान है कि पट्टाधारक मौजूदा पट्टे में अन्य खनिजों को शामिल करने के लिए राज्य सरकार को आवेदन कर सकते हैं। महत्वपूर्ण और अन्य खनिजों को शामिल करने के लिए कोई अतिरिक्त राशि का भुगतान करने की आवश्यकता नहीं होगी। इनमें लिथियम, ग्रेफाइट, निकल, कोबाल्ट, सोना और चांदी जैसे खनिज शामिल हैं। इस अधिनियम के माध्यम से देश में खनिज अन्वेषण के वित्तपोषण हेतु राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट की स्थापना करने का प्रावधान है। विधेयक में खनिज एक्सचेंजों के पंजीकरण और विनियमन हेतु एक प्राधिकरण की स्थापना का भी प्रावधान है।
इस विधेयक को पेश करते हुए कोयला और खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में खदानों के आवंटन के लिए एक पारदर्शी व्यवस्था अपनाई गई है। पिछली यूपीए सरकार पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि पहले खदानों की नीलामी बिना किसी जाँच-पड़ताल के की जाती थी, जिसके परिणामस्वरूप भ्रष्टाचार होता था।
इस विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा की मालविका देवी ने कहा कि पिछली सरकार के दौरान खनन क्षेत्र पुराने कानूनों और नियामक बाधाओं का बंधक बना हुआ था, जिससे व्यापार करने में कठिनाई होती थी। उन्होंने कहा कि यह विधेयक पारदर्शिता का प्रतीक है। टीडीपी के जी लक्ष्मीनारायण ने भी विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि यह विधेयक खदान क्षेत्र में पारदर्शिता लाएगा।