सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु आज विशाखपट्टणम तट पर इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू -आईएफआर 2026 में शामिल हुई। यह अभ्यास भारत की बढ़ती समुद्री क्षमता और वैश्विक नौसैनिक सहयोग के प्रति देश की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। राष्ट्रपति ने आईएनएस सुमेधा पर सवार होकर 71 भारतीय और विदेशी जहाजों के विशाल समूह का निरीक्षण किया। इस बेड़े में समुद्री भागीदारी के पैमाने और विविधता को दर्शाते हुए भारतीय नौसेना के 45 जहाज, 19 अतिथि युद्धपोत और तटरक्षक बल, व्यापारिक नौसेना और अनुसंधान संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाले अन्य जहाज शामिल हैं। यह अभ्यास युद्धपोतों और पनडुब्बियों की औपचारिक परेड, नौसैनिक विमानों के सटीक फ्लाईपास्ट, नौकायन पोतों की परेड, हेलीकॉप्टर के नेतृत्व में खोज और बचाव प्रदर्शन और मरीन कमांडो के युद्ध अभ्यास के साथ संपन्न हुई। इस अभ्यास में परिचालन तत्परता और समुद्री शक्ति का जीवंत प्रदर्शन किया गया।
इस अवसर पर राष्ट्रपति ने टिकाऊ समुद्री व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए देशों के बीच एकता, विश्वास और सामूहिक उत्तरदायित्व के महत्व पर जोर दिया। विभिन्न राष्ट्रीय ध्वजों वाले जहाजों और विश्व भर के नाविकों की उपस्थिति को वैश्विक एकजुटता का सशक्त प्रतीक बताते हुए उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सम्मेलन का विषय, ‘महासागरों के माध्यम से एकजुट’, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को सहयोग का एक सशक्त संदेश देता है।
राष्ट्रपति ने कहा कि समुद्री क्षेत्र में भारत की भागीदारी वसुधैव कुटुंबकम के सभ्यतागत लोकाचार से प्रेरित है, जिसका अर्थ है कि विश्व एक परिवार है। उन्होंने व्यापार, वाणिज्य और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में समुद्र के महत्व पर प्रकाश डाला। विशाखपट्टणम की समृद्ध समुद्री विरासत और नौसैनिक महत्व का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि इस अभ्यास की मेजबानी ने शहर के रणनीतिक महत्व को और मजबूत किया है।
विशाखापट्टणम वर्ष 2016 के बाद दूसरी बार अंतर्राष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा की मेजबानी कर रहा है।