राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा है कि भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका है और उन्हें देश में शासन को मजबूत करने के लिए विभागीय सीमाओं से ऊपर उठना होगा। राज्य सिविल सेवाओं और लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी के अधिकारियों ने नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति से मुलाकात की।
अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि अब उन पर प्राथमिकताओं से कहीं अधिक व्यापक जिम्मेदारियां हैं। उन्होंने बल देते हुए कहा कि इन व्यापक जिम्मेदारियों के लिए व्यापक राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य की आवश्यकता है जो प्रशासनिक विकेंद्रीकरण को समाप्त करे और सहयोग को बढ़ावा दे।
उन्होंने कहा कि संस्थागत सामंजस्य बढ़ाने और शासन तंत्र को मजबूत करने के लिए सामूहिक व्यावसायिकता, समन्वय और प्रतिबद्धता आवश्यक है।
राष्ट्रपति ने कहा कि उनके द्वारा लिए गए प्रत्येक निर्णय 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लक्ष्य के अनुरूप होने चाहिए। राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी होने के नाते, उनसे जनता की जरूरतों और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करने की अपेक्षा की जाएगी।
उन्होंने उन्हें सलाह दी कि वे अधिक जटिल चुनौतियों का सामना करते समय अपने बहुमूल्य अनुभव और ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ की भावना से प्रेरित रहें।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत का एक विकसित राष्ट्र में परिवर्तन तभी सार्थक होगा जब इसका लाभ सबसे कमजोर और वंचित वर्गों तक पहुंचेगा। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे यह सुनिश्चित करें कि भौगोलिक, सामाजिक या आर्थिक कारणों से कोई भी समुदाय पीछे न छूट जाए।