फ़रवरी 21, 2026 1:56 अपराह्न

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गोवा समुद्री सम्मेलन-2026 का पांचवां संस्करण गोवा में शुरू, हिंद महासागर क्षेत्र में उभरती समुद्री चुनौतियों पर चर्चा

नौसेना के गोवा समुद्री सम्मेलन 2026 का पांचवां संस्करण आज गोवा के वेरेम में नौसेना युद्ध महाविद्यालय में शुरू हुआ।

सम्मेलन का विषय है- हिंद महासागर क्षेत्र: उभरती समुद्री चुनौतियों का समाधान- गतिशील खतरों को कम करने के लिए प्रगतिशील प्रयास।

सम्मेलन में हिंद महासागर क्षेत्र में उभरती समुद्री चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोगात्मक तंत्र और साझेदारियों को मजबूत करने पर मुख्य रूप से चर्चा होगी।

नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने पांचवे गोवा समुद्री सम्मेलन का उद्दाघटन करते हुए समुद्री क्षेत्र में सहयोग के महत्व पर बल दिया है।

नौसेना प्रमुख ने विशाखापट्टणम में अंतर्राष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा और मिलन सम्मेलन के बंदरगाह तथा समुद्री चरणों के लिए हाल ही में 74 देशों के सम्मेलन को समुद्री महाकुंभ बताया। उन्होंने कहा कि व्यापक भागीदारी वैश्विक समुद्री सहयोग में वृद्धि को दर्शाती है।

एडमिरल त्रिपाठी ने बताया कि आईओएस सागर का दूसरा चरण जल्द ही शुरू किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में हिंद महासागर के तटवर्ती 14 देश इस क्षेत्र की साझा चुनौतियों पर चर्चा करेंगे। नौसेना प्रमुख ने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय नौसेना के नेतृत्व वाली इस पहल के सार्थक परिणाम मिलेंगे।

 

नशीले पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी, सुरक्षा चुनौतियां, अवैध रूप से मछली पकड़ना और समुद्री सुरक्षा पर पड़ोसी देशों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता चर्चा के मुख्य मुद्दे हैं।

कार्यक्रम में रणनीतिक योजना, उपग्रह प्रणालियों का उपयोग, समुद्री गतिविधियों की गहन निगरानी, ​​नौसैनिक कार्यबल का गठन और परिचालन मार्गदर्शन पर विचार विमर्श किया जाएगा।

इस सम्मेलन में चौदह देशों के नौसेना प्रमुख और वरिष्ट अधिकारी भाग ले रहे है। नौसेना के पूर्व प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश ने समुद्री सुरक्षा के लिए बढ़ती चुनौतियों पर चर्चा की।

उन्होंने कहा कि हिंद महासागर से वैश्विक कंटेनर यातायात का आधा हिस्सा और तेल शिपमेंट का दो-तिहाई हिस्सा गुजरता है, जो इसे वैश्विक व्यापार और डेटा प्रवाह के लिए महत्वपूर्ण बनाता है।

उन्होंने महासागर को स्वतंत्र, सुरक्षित और टिकाऊ बनाए रखने के लिए समुद्री क्षेत्र की जागरूकता बढ़ाने, कानूनी समन्वय और क्षेत्रीय सहयोग का आह्वान किया।

एडमिरल प्रसन्ना ने साझा खतरे की धारणाओं, समुद्री जागरूकता, कानूनी तथा नियामक समन्वय, समन्वित खुफिया-आधारित अभियानों और क्षमता निर्माण पर बल दिया।

मालदीव के प्रतिनिधि कर्नल अमानुल्ला अहमद रशीद ने एकीकृत सेंसर नेटवर्क, वास्तविक समय में क्षेत्रीय समुद्री जागरूकता तंत्र, संयुक्त प्रशिक्षण तथा अभ्यास, क्षमता निर्माण और कानूनी सामंजस्य की आवश्यकता पर बल दिया।

        

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