नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा है कि पिछले एक दशक में गैर-जीवाश्म स्रोतों से देश की स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह 81 गीगावाट से बढ़कर लगभग 275 गीगावाट हो गई है। कल नई दिल्ली में आयोजित चौथे राष्ट्रीय कृषि-नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री जोशी ने कहा कि सौर सिंचाई में भारत के कृषि और ऊर्जा क्षेत्रों को बदलने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि यह तकनीक किसानों को दिन के समय विश्वसनीय सिंचाई प्रदान करके टिकाऊ खेती को बढ़ावा दे सकती है। साथ ही देश की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को भी बढ़ा सकती है।
कृषि और घरेलू क्षेत्रों में सौर ऊर्जा के विस्तार के उद्देश्य से बनाई गई सरकारी योजनाओं पर श्री जोशी ने कहा कि पीएम-कुसुम योजना के अंतर्गत 10 लाख से अधिक स्टैंडअलोन सौर कृषि पंप स्थापित किए गए हैं। वहीं, देश भर में 13 लाख से अधिक ग्रिड-कनेक्टेड पंपों को सौर ऊर्जा से संचालित किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत 31 लाख से अधिक परिवारों को छतों पर सौर पैनल लगाने का लाभ मिला है। श्री जोशी ने बताया कि सरकार पीएम-कुसुम 2.0 योजना तैयार कर रही है। इसमें फसलों के साथ-साथ सौर पैनलों की स्थापना को बढ़ावा देने के लिए 10 गीगावाट का कृषि-ऊर्जा घटक शामिल होगा।
उन्होंने कहा कि ऊर्जा, पर्यावरण और जल परिषद की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत 2040 तक अन्य विकसित देशों की ऊर्जा मांग को पार कर सकता है।