THE HEADLINES:
- Political parties intensify election campaign for assembly polls in Maharashtra and Jharkhand; Prime Minister and Senior BJP leader Narendra Modi addresses public meeting at Dhule in Maharashtra.
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा- भ्रष्टाचार कतई बर्दाश्त न करने की सरकार की नीति से ये जड़ से समाप्त हो सकेगा।
- External Affairs Minister Dr. S. Jaishankar emphasizes collaboration between India and ASEAN can be crucial in addressing contemporary challenges.
- सर्वोच्च न्यायालय ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अल्पसंख्यक दर्जे से संबंधित मामले में वर्ष 1967 के फैसले को निरस्त किया। मामला नियमित खंडपीठ को सौंपा।
- In Badminton, India’s Kiran George enters the Men’s Singles semi-finals at Korea Masters tournament in Iksan city.
- क्रिकेट में, चार मैचों की श्रृंखला के पहले ट्वेंटी-ट्वेंटी मैच में आज डरबन में भारत का सामना दक्षिण अफ्रीका से होगा।
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And, now time for our segment DATELINE INDIA in which we take a look at the developments taking place at national or global level. Today we will talk about WORLD RADIOGRAPHY DAY.
World Radiography Day is a global healthcare awareness event observed on the 8th of November every year to increase public awareness with respect to the vital role of diagnostic imaging, radiation therapy and radiographer play in healthcare management.
वर्ल्ड रेडियोग्राफी डे हर साल 8 नवम्बर को मनाया जाता है। यह दिन 1895 में जर्मन वैज्ञानिक और भौतिक विज्ञानी विल्हेम रोएंटजेन द्वारा एक्स-रे की खोज को याद करने का दिन है। चिकित्सा क्षेत्र में रेडियोलॉजी और एक्स-रे जैसी तकनीकों के योगदान को मान्यता देने का दिन है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य रेडियोलॉजी के पेशेवरों की भूमिका को सम्मानित करना और लोगों में जागरूकता फैलाना है। यह रेडियोलॉजी के क्षेत्र में हो रहे नए विकास और शोध को बढ़ावा देने का भी एक अवसर है।
Importance of World Radiography Day
Radiology is the medical field that uses imaging technology to identify and treat conditions affecting human and animal bodies. To diagnose or treat diseases, a range of imaging techniques are utilised, including fluoroscopy, positron emission tomography (PET), computed tomography (CT), ultrasound, X-ray radiography, and magnetic resonance imaging (MRI). Using imaging technologies to guide minimally invasive medical operations is known as interventional radiology.
विश्व रेडियोग्राफी दिवस 2024 का थीम है “रेडियोग्राफर: अदृश्य को देखना।”
यह थीम स्वास्थ्य सेवा में रेडियोग्राफरों के महत्व और चिकित्सा समस्याओं के निदान और उपचार में उनकी भूमिका पर प्रकाश डालती है। ज़रा सोचकर देखिए लालिमा एक ग़लत एक्सरे किसी रोगी के इलाज को किस दिशा में ले जा सकता है।
World Radiography Day 2024 Theme
This year, 2024, the World Radiography Day Theme is “Radiographers: Seeing the Unseen”. This theme highlights radiographers’ importance in healthcare and their role in diagnosing and treating medical issues.
इसी वजह से यह दिन मनाया जाता है। आइए जान लेते हैं विश्व रेडियोग्राफी दिवस के बारे में कि यह क्यों मनाया जाता है और इसका इतिहास क्या है।
2007 में, 8 नवंबर को, इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ रेडियोग्राफर्स एंड रेडियोलॉजिकल टेक्नोलॉजिस्ट द्वारा विश्व रेडियोग्राफी दिवस मनाया गया। 2012 में, इस दिन का पहला बड़ा आयोजन यूरोपियन सोसाइटी ऑफ रेडियोलॉजी (ESR), ने किया। उसके बाद से ही हर साल 8 नवंबर के दिन विश्व रेडियोग्राफी दिवस मनाया जा रहा है।
एक्स-रे का आविष्कार तो चिकित्सा इतिहास में मील का पत्थर था ही क्योंकि एक्स-रे और इमेजिंग डायग्नोस्टिक टेस्ट की खोज के बाद से ही बीमारियों का निदान आसान हो गया है। 1896 में जॉन हॉल एडवर्ड्स द्वारा पहली बार शल्य चिकित्सा प्रक्रियाओं में एक्स-रे का प्रयोग किया गया और 1999 में खगोलीय अनुप्रयोगों के लिए एक्स-रे का सफलतापूर्वक उपयोग किया गया। ब्रह्मांड में हो रही हिंसक प्रक्रियाओं का पता लगाने के लिए चंद्रा एक्स-रे वेधशाला भी इसी दिन लॉन्च की गई थी।
रेडियोग्राफी जैसी तकनीक का प्रयोग करके कई सारी चोट, बीमारियों का पता लगाया जा सकता है जो आपकी आंखों से नहीं दिखती हैं या जो आपके शरीर के अंदर मौजूद होती हैं। अगर आपको कोई अंदरूनी चोट लग गई है तो इस तकनीक से कहां क्या चीज प्रभावित हुई है वह भी पता चल सकता है। इस आधार पर ही डॉक्टर मरीज को उसकी स्थिति के हिसाब से कोई भी इलाज सुझा सकते हैं या फिर सर्जरी आदि की शुरुआत कर सकते है।
International Patient Safety Goals
There are some International Patient Safety Goals (IPSGs), and CT radiographers need to be aware of the actions to attain them are:
Identifying patients correctly
Improving effective communication
Improving safety of high alert medication
Ensuring correct site, correct procedure, correct side
Reducing the risk of healthcare infections
रेडियोलॉजी एक मेडिकल फील्ड है जिसमें इमेजिंग तकनीक का प्रयोग करके मानव या पशुओं के शरीर को प्रभावित करने वाली समस्याओं के बारे में पता किया जाता है। इसमें अलग अलग तरह की तकनीक उपलब्ध होती हैं जिनका प्रयोग अलग अलग शारीरिक स्थिति के लिए किया जाता है जैसे MRI, CT स्कैन, अल्ट्रासाउंड, X रे आदि।
दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता सूचकांक लगातार बहुत खराब श्रेणी में बना हुआ है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, दिल्ली में आज सवेरे वायु गुणवत्ता सूचकांक 384 दर्ज किया गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, शहर के कुछ हिस्सों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 400 के आंकड़े को पार करते हुए गंभीर स्तर पर पहुंच गया।
दिल्ली और आसपास के इलाकों में प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है और इस बीच दिल्ली के तमाम अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है आकाशवाणी से खास बातचीत में एम्स के वरिष्ठ डॉक्टर करण मदान ने बताया कि दमा और सांस के मरीज को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
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उगते हुए सूरज को अर्घ्य देने के साथ चार दिवसीय छठ पर्व का आज समापन हो गया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं।
पहला दिन – नहाय-खाय: छठ पूजा की शुरुआत कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को नहाय-खाय से होती है। व्रती इस दिन नदी में स्नान करते हैं और मिट्टी के चूल्हे पर पकाया गया भोजन ग्रहण करते हैं।
दूसरा दिन – खरना: पंचमी के दिन व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखते हैं और शाम को पूजा कर प्रसाद के रूप में गुड़ की खीर, रोटी और फल ग्रहण करते हैं। इसे ग्रहण करने के बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत आरंभ होता है।
तीसरा दिन – संध्या अर्घ्य: छठ के तीसरे दिन, यानी षष्ठी के दिन, व्रती डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं।
चौथा दिन – उषा अर्घ्य: छठ पूजा के अंतिम दिन यानी सप्तमी को उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। यह अर्घ्य जीवन में नए सवेरे, आशा और नई ऊर्जा का प्रतीक है। (अर्घ्य देने के बाद व्रती अपना उपवास तोड़ते हैं और प्रसाद का वितरण करते हैं।
अर्घ्य के साथ घाटों पर छठ के पारंपरिक गीत गाए जाते हैं। छठ पूजा के दौरान गाए जाने वाले ये गीत न केवल बिहार और भोजपुरी संस्कृति की बल्कि भारत के लोकसंगीत की अनमोल धरोहर हैं।
जब बात आई है छठ के गीतों की तो एक आवाज़ जिसके बिना यह पर्व पूरा नहीं होता वो है पद्मश्री और पद्मभूषण से सम्मानित, मैथिली और भोजपुरी की लोकगायिका शारदा सिन्हा की। संयोग देखिए लालिमा कि उसी छठ पर्व पर, जब हर घर में, हर चौक-चौराहे पर उनके ही गीत बज रहे थे, छठ का यह स्वर अनंत में विलीन हो गया।
बिहार, उत्तरप्रदेश जैसे हिंदी भाषी प्रदेशों में चाहे कोई त्यौहार हो या शादी-ब्याह का मौक़ा, उनके गीतों के बिना पूरे नहीं होता। मैथिली और भोजपुरी के संगीतप्रेमी उन्हें श्रद्धा से माँ या माई कहकर बुलाते हैं।
उनकी आवाज़ सिर्फ़ बिहार ही नहीं बल्कि देश के हर संगीतप्रेमी के दिल में ज़िंदा रहेगी!
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और अब समय है अपने क्षेत्रीय संवाददाताओं से जानने का, कि उनके पास क्या विशेष है –
बिहार में लाखों श्रद्धालुओं ने विभिन्न नदियों के तटों पर सूर्य देव और छठी मैया को अर्घ्य दिया। इसके अलावा, लोगों ने झीलों, जलाशयों और अस्थायी रूप से छतों पर जल संग्रह कर छठ पूजा मनाई। ब्योरा हमारे संवाददाता से
“बिहार में लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं ने गंगा, गंडक, सोन, बागमती सहित विभिन्न नदियों के किनारे छठ घाटों पर उदीयमान भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित किया। इसके साथ ही चार दिनों का बिहार का सबसे पवित्र पर्व आज पारंपरिक श्रद्धा के माहौल में संपन्न हो गया । इधर, लाखों की संख्या में लोगों ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में स्थित सूर्य मंदिरों के परिसर में बने तालाब या जलकुंडों में उषाकालीन अर्घ्य दिया। पटना के छठ घाटों के अलावा बक्सर जिले के रामरेखा घाट, अररिया के परमान नदी पर त्रिशूलिया घाट और अन्य स्थानों पर छठ पर्व की महिमा देखते ही बन रही थी । धर्मेन्द्र कुमार राय, आकाशवाणी समाचार, पटना”
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मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले के बड़नगर तहसील का खेड़ावदा गांव आज पूरे जिले के लिए एक मिसाल बन चुका है। यहाँ की ग्राम पंचायत ने गाँव को स्वच्छ और आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक अनूठी पहल शुरू की हैं। स्वच्छता और साफ-सफाई के साथ अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं को जोड़कर, खेड़ावदा को एक संपूर्ण ‘ओडीएफ प्लस’ मॉडल ग्राम के रूप में विकसित किया गया है।
“खेड़ावदा गाँव स्वच्छता को एक बार का काम मानने के बजाय, इसे ग्रामीणों की आदत में बदलने के लिए जन अभियान चलाया। इस अभियान के तहत, बच्चों की टोलियां और महिलाओं के समूह गांव के घर-घर जाकर कचरे को सूखे और गीले के तौर पर अलग अलग करने की प्रक्रिया को समझाते है। पंचायत ने मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए स्वच्छ पेयजल का महत्व समझाते हुए आर.ओ. प्लांट और पेयजल टंकी की व्यवस्था की। गाँव का कोई भी व्यक्ति मात्र 6 रुपए देकर पूरे महीने स्वच्छ पानी ले सकता है। इससे न केवल गाँव के लोगों के स्वास्थ्य में सुधार हुआ बल्कि पंचायत के प्रति उनका विश्वास भी बढ़ा। ग्राम के विद्यालयों में स्मार्ट क्लास के माध्यम से बच्चों को पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन और स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया। शिक्षकों ने नियमित रूप से बच्चों को स्वच्छता के पाठ पढ़ाए, जिससे स्वच्छता का संदेश नई पीढ़ी में गहराई से उतरा। डिजिटल इंडिया की ओर कदम बढ़ाते हुए, ग्राम पंचायत खेड़ावदा को पूर्ण रूप से वाईफाई जोन बनाकर इंटरनेट से कनेक्ट किया गया है एवं सभी चौराहों व शासकीय कार्यालयों पर सी.सी.टी.वी. कैमरे लगाए गए है। ग्राम पंचायत ने बैंक से ऋण लेकर एक कचरा वाहन खरीदा और हर घर से कचरा एकत्रित करने की व्यवस्था की। एकत्रित कचरे को पृथक कर गीले कचरे से खाद तैयार की गई, जिसे गाँव के किसान कृषि के लिए इस्तेमाल करते हैं। सूखे कचरे को कबाड़ में बेचकर सफाई कर्मियों के मानदेय की व्यवस्था की गई। गाँव के हर घर में डस्टबिन रखने के लिए प्रेरित किया गया ताकि लोग कचरे को खुले में न फेंकें। गाँव में सुरक्षा के लिए सभी चौराहों और शासकीय कार्यालयों में सी.सी.टीवी कैमरे लगाए गए हैं। विद्यालयों में बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालयों का निर्माण किया गया है। खेड़ावदा आज एक आदर्श गाँव का प्रतीक है। यह एक उदाहरण है कि कैसे एक गाँव अपने प्रयासों से स्वच्छ, सुजल और आत्मनिर्भर बन सकता है। परिक्रमा के लिए भोपाल से मैं संजीव शर्मा””
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The much-anticipated Cuttack Baliyatra 2024 is set to begin on November 15, marking an eight-day celebration of Odisha’s rich maritime history along the Mahanadi River. Here is a report from Cuttack…
“Baliyatra honours the ancient trade voyages by Odia mariners, or Sadhabas, to Southeast Asia. Organized by the Cuttack district administration, this year’s Baliyatra promises to be bigger than ever, with a range of attractions, cultural events, and a focus on sustainability. A key highlight for Baliyatra is a new tunnel aquarium. Additionally, a dazzling laser show will recount Odisha’s cultural heritage through visual displays, including historic moments and tributes to figures such as Mahatma Gandhi, Netaji Subash Chandra Bose. The fair introduces “green” initiatives. A plastic bottle return program offers cashback incentives to encourage recycling, while special green corridors and increased toilet facilities will enhance visitor comfort. Beyond entertainment, Baliyatra remains a major trade fair, with over 500 ORMAS stalls showcasing local handicrafts, food, and textiles. The Odisha government has also arranged a mobile tableau to tour nearby districts, spreading awareness of the festival and inviting wider participation. Speaking to Akashvani Samachar district cultural officer of Cuttack Nalini Kanta Sahu Said,
The festival will conclude on 22 November, following a series of performances, showcases, and traditions that encapsulate the spirit of Odisha’s rich cultural legacy. For Parikrama This is Itishree Singh Rathaur
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राष्ट्रीय पुस्तक न्यास-एनबीटी कल से सत्रह नवंबर तक लखनऊ के गोमती रिवरफ्रंट पार्क में गोमती बुक फ़ेस्टिवल का आयोजन करने जा रहा है। इसका शुभारम्भ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे। एनबीटी के निदेशक युवराज मलिक ने बताया कि इस मेले में पाठकों को नई-नई पुस्तकें खरीदने का मौका मिलेगा। इसके अलावा चिल्ड्रन फिल्म फेस्टिवल का आयोजन भी किया जायेगा।
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Now, we will take you on a tour of India’s freedom struggle, and recall events that happened on this day.
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In business news today:-
Domestic benchmark equity indices today ended with marginal losses. The 30-share BSE Sensex dipped 55 points, or 0.07 percent, to close at 79,486, while the NSE Nifty50 fell 51 points, or 0.21 percent, to settle at 24,148.
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अब चलते है खेल के मैदान में और जानते है वहां की हलचल –
In Cricket, India will take on South Africa in the first T20 International of the four-match series at Kingsmead, in Durban today. The match will begin at 8:30 PM Indian Standard Time.
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इसके अलावा, कोरिया बैडमिंटन मास्टर्स टूर्नामेंट के पुरुष सिंगल्स सेमीफाइनल में भारत के किरण जॉर्ज ने अपनी जगह पक्की कर ली है। वहीं, शतरंज में भारत के अर्जुन एरिगैसी ने कल चेन्नई ग्रेंड मास्टर्स में एलेक्सी सरना पर तीसरे दौर की शानदार जीत के बाद फिडे विश्व शतरंज रैंकिंग में नंबर 2 पर पहुंचकर इतिहास रच दिया है।
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और अब समय है उन व्यक्तित्व को याद करने का जिनकी आज है पुण्य तिथि या जन्मदिवस। श्रोताओं आज सबसे पहले याद कर रहे है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी के 97वें जन्मदिन पर उन्हें शुभकामनाएं दीं। सोशल मीडिया पोस्ट में श्री मोदी ने कहा कि भारत रत्न लालकृष्ण आडवाणी देश के सबसे प्रशंसित राजनेताओं में से हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि श्री आडवाणी को उनकी बुद्धि और समृद्ध अंतर्दृष्टि के लिए हमेशा सम्मान दिया गया है।
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Dinanath Batra, also spelled Dina Nath Batra,[2] (3 March 1930 – 7 November 2024) was the general secretary of Vidya Bharati, the school network run by the Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS).[2] He also founded the educational activist organisations Shiksha Bachao Andolan Samiti and Shiksha Sanskriti Utthan Nyas.
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जौन एलिया
मैं जो हूँ ‘जौन एलिया’ हूँ जनाब
इस का बेहद लिहाज़ कीजिएगा
ऐसी ठसक और बेबाक़ी से अपना परिचय देनेवाले उर्दू के अज़ीम शायर जौन एलिया की आज पुण्यतिथि है। सरल ज़बान में निहायत गहरी बात कहनेवाले जौन, शायर होने के साथ ही पत्रकार, अनुवादक, गद्यकार और विचारक भी थे। उत्तर प्रदेश के अमरोहा में जन्मे सैयद हुसैन जौन असग़र को न चाहते हुए भी 1956 में माँ-बाप की मौत के बाद बड़े भाई के पास पाकिस्तान जाना पड़ा। लेकिन ताज़िंदगी वो अमरोहा और हिंदुस्तान को याद करते रहे। अपने बारे में उनका कहना था कि ‘पाकिस्तान आकर मैं हिंदुस्तानी हो गया’। वो लिखते भी हैं:
हम आँधियों के बन में किसी कारवाँ के थे
जाने कहाँ से आए हैं, जाने कहाँ के थे
क्या पूछते हो नाम-ओ-निशाँ-ए-मुसाफ़िराँ
हिन्दोस्ताँ में आए हैं, हिन्दोस्ताँ के थे
पाकिस्तान पहुँचते ही शायरी की दुनिया में उनका नाम हो गया था। बिखरे हुए लंबे बालों वाला ये शायर मुशायरों की कामयाबी की ज़मानत था। इंसानी जज़्बातों और मन:स्थितियों पर जैसे अशआर उन्होंने कहे हैं वैसी मिसाल उर्दू शायरी में और कोई नहीं मिलती।
अपनी शायरी के प्रकाशन की तरफ़ वे बेपरवाह थे। लोगों के बहुत आग्रह पर 1990 में लगभग साठ साल की उम्र में उन्होंने अपना पहला संग्रह ‘शायद’ प्रकाशित कराया। उसके बाद कई और संग्रह ‘गोया’, ‘लेकिन’, ‘यानी’ और ‘गुमान’ प्रकाशित हुए।
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Sitara Devi (born Dhanlakshmi; 8 November 1920 – 25 November 2014) was an Indian dancer of the classical Kathak style of dancing, a singer, and an actress. She was the recipient of several awards and accolades, and performed at several prestigious venues in India and abroad; including the Royal Albert Hall, London (1967) and at the Carnegie Hall, New York (1976).
At a young age Devi met Rabindranath Tagore. He out of affection described her as Nritya Samragni ( नृत्य सम्राज्ञी ), meaning the empress of dance, after watching her performance when she was just sixteen years old. Some people consider her as the Kathak queen.
जिसने आठ साल की उम्र तक इनका पालन-पोषण किया। आठ साल की उम्र में इनकी शादी कर दी गई पर स्कूल जाने के लिए जिद पकड़ लेने पर उनका विवाह टूट गया और उन्हें स्कूल में प्रवेश दिला दिया गया जहां डांस और मंच से उनका रिश्ता शुरू हुआ। जिसके बाद सितारा देवी के पिता आचार्य सुखदेव ने क्रांतिकारी कदम उठाया और घर की बेटियों को नृत्य सिखाना शुरू किया। कुछ समय बाद सितारा देवी का परिवार मुंबई चला आया जहाँ फ़िल्मों में कोरियोग्राफ़ी करने के अलावा उन्होंने कुछ फ़िल्मों में अभिनय भी किया।
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उषा उत्थुप
इंडी-पॉप और जैज़ क्वीन उषा उत्थुप का आज जन्मदिन है। चेन्नई के एक छोटे से नाइट क्लब में गाने से लेकर फ़िल्मों और प्राइवेट albums में कई हिट गाने देने तक, उत्थुप ने कई पीढ़ियों को मंत्रमुग्ध किया है।
अमीन सयानी ने ऊषा उत्थुप को रेडियो सिंगिंग शो में गाने का मौका दिया और बॉलीवुड में उनका सफ़र शुरू हुआ 1978 में आई फ़िल्म शालीमार के गीत ‘वन टू चा चा चा’ से। इसके बाद अस्सी के दशक में डिस्को म्यूजिक के आगमन के साथ ही उषा उत्थुप का craze बढ़ता गया। सत्रह भारतीय और आठ विदेशी भाषाओं में उन्होंने गीत गाए हैं। पद्मश्री और पद्मभूषण सहित कई पुरस्कारों से उन्हें सम्मानित किया गया है।
उनकी आवाज़ और बिंदास गायकी तो उन्हें अलग करती ही थी, लेकिन उससे भी ज़्यादा जिस बात ने लोगों का ध्यान खींचा, वो था उनका पारंपरिक भारतीय पहनावा यानी सारी, बड़ी सी बिंदी और बालों में गजरा। और इस पहनावे के साथ वेस्टर्न स्टाइल ऑफ़ singing।
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